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समस्तीपुर : चचेरे भाई ने ही रची थी रेलवे लोको पायलट के ह’त्या की साजिश, मृतक के ससुर से 50 हजार में हथियार खरीदकर उसी के दामाद की कर दी ह’त्या 

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समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले के ताजपुर थाना क्षेत्र के दर्जिनिया पुल के पास बीते 2 अप्रैल की देर रात हुए लोको पायलट प्रमोद कापर हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इसको लेकर सोमवार को एसपी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रभारी एसपी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि प्रमोद की हत्या किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि उसके सगे चचेरे भाई मंजीत कुमार ने ही की थी। पुलिस ने आरोपी मंजीत को गिरफ्तार कर उसके पास से हत्या में इस्तेमाल की गई एक देशी पिस्टल, दो मैगजीन, दस गोलियां और व घटना को अंजाम देने वाले कार भी बरामद कर ली है।

प्रभारी एसपी संजय पांडे ने बताया कि प्रमोद और मंजीत दोनों चचेरे भाई थे और एक ही घर में रहते थे। प्रमोद रेलवे में लोको पायलट था और मेहनत की कमाई से लगातार जमीनें खरीद रहा था। मंजीत को अपने भाई की इस तरक्की से ईर्ष्या होने लगी थी। इसके अलावा, प्रमोद चाहता था कि मंजीत अपने परिवार के साथ उसी के घर में रहे, लेकिन मंजीत को यह दबाव पसंद नहीं आ रहा था। इसी जलन और पारिवारिक विवाद के कारण मंजीत ने अपने भाई को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।

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पुलिस की पूछताछ में मंजीत कापर ने हत्या को अंजाम देने की बात स्वीकार कर ली है। पूछताछ में मंजीत ने बताया कि वारदात को अंजाम देने के पीछे दो वजह थी। पहला यह की प्रमोद की पत्नी से उसके अवैध संबंध थे। वहीं दूसरा की प्रमोद उसे अपने घर में नहीं रहने देना चाहता था। इस वजह से उसकी हत्या कर दी। हैरानी की बात यह है कि इस हत्याकांड की साजिश में प्रमोद के ससुर चरण सहनी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। मंजीत ने पुलिस को बताया कि उसने वारदात को अंजाम देने के लिए प्रमोद के ससुर से ही 50 हजार रुपये में एक पिस्टल और 12 गोलियां खरीदी थीं। हथियार खरीदने के बाद उसने करीब एक महीने तक हत्या की प्लानिंग की।

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प्रमोद ने ही 8 महीने पहले मंजीत की शादी अपनी चचेरी साली से करवाई थी और उसका घर भी बनवा रहा था, लेकिन मंजीत ने उसी उपकार का बदला खून से दिया। हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए समस्तीपुर पुलिस और डीआईयू की टीम ने रेलवे स्टेशन से लेकर घटनास्थल तक के सारे सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में एक सफेद कार दिखी जो ड्यूटी से लौट रहे प्रमोद का पीछा कर रही थी। जांच में पता चला कि वह कार मंजीत की है। जब पुलिस ने कार को कब्जे में लिया, तो उसके बंपर पर टक्कर के निशान थे।

तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जब मंजीत को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। मंजीत ने पुलिस को बताया कि 2 अप्रैल की रात उसने प्रमोद की पत्नी से बात कर पता लगाया कि प्रमोद घर के लिए निकल चुका है। इसके बाद उसने अपनी कार से प्रमोद का पीछा किया और ताजपुर के दर्जनिया पुल के पास उसे दो गोलियां मार दीं, जिससे प्रमोद की मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि उसने और भी फायरिंग की थी, लेकिन गोली फंस गयी थी। प्रभारी एसपी संजय कुमार पांडेय ने साफ किया है कि इस वारदात में प्रमोद की पत्नी गीतांजलि का कोई हाथ नहीं है। पुलिस अब प्रमोद के ससुर से पूछताछ कर रही है ताकि हथियार की सप्लाई के मामले में आगे की कार्रवाई की जा सके।

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बता दें कि लोको पायलट की हत्या के बाद स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा था और लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। मृतक की पत्नी के आवेदन पर पहले 8 लोगों को नामजद किया गया था, लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक जांच ने असली गुनहगार तक पहुँचा दिया। आरोपी मंजीत अब जेल की सलाखों के पीछे है। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की कोशिश करेंगे ताकि पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल सके। वहीं पहले से गिरफ्तार एक व्यक्ती की भूमिका इस हत्याकांड में नहीं थी। पुलिस उसके रिहाई के लिये कोर्ट में पक्ष रखेगी।

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