एक लड़की की सूझबूझ से खुला पूरे गिरोह का राज, वर्षों से बंधक बने 105 लड़के-लड़कियों को ऐसे छुड़ाया गया चंगुल से

समस्तीपुर : गेलवे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को झांसे में लेकर बंधक बनाकर रखने और उनसे लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में 105 युवक-युवतियों की बरामदगी के बाद पूरे शहर में दिनभर इसी मामले की चर्चा होती रही। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मुसापुर और धरमपुर समेत विभिन्न इलाकों में किराये के करीब 10 मकानों में अलग-अलग राज्यों से लाए गए युवाओं को रखा गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों ने इस पूरे नेटवर्क को एक बड़े संगठित गिरोह की ओर संकेत किया है। स्थानीय लोगों और जांच से जुड़े सूत्रों की मानें तो यदि व्यापक स्तर पर सभी संदिग्ध ठिकानों की तलाशी ली जाए तो ठगी के शिकार युवाओं की संख्या 300 के पार पहुंच सकती है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए विशेष टीम गठित करने की तैयारी में जुटी है और गिरोह के फरार सदस्यों की तलाश जारी है।
एक लड़की की सूझबूझ से खुला पूरे गिरोह का राज :
इस पूरे मामले का खुलासा असम की रहने वाली एक युवती रेणू कुमारी (काल्पनिक नाम) की सूझबूझ से हुआ। नौकरी लगने की उम्मीद लेकर एक दोस्त के बुलाने पर वह भी समस्तीपुर पहुंची थी। शुरुआती दिनों में उसे प्रशिक्षण और नौकरी की प्रक्रिया का भरोसा दिलाया गया, लेकिन कुछ सप्ताह बाद हालात बदलने लगे। रेणू के अनुसार, कंपनी से जुड़े लोगों ने उसे एक अंधेरे कमरे में बंद कर दिया और मोबाइल जमा कराने का दबाव बनाने लगे। परिसर में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग कमरे और मकान थे तथा उन पर नजर रखने के लिए वार्डन तैनात किए गए थे।

करीब एक दर्जन मकानों में सभी अलग-अलग रह रहे थे। गिरोह में पुरुषों के साथ महिलाएं भी सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। खतरे का आभास होते ही रेणू ने चुपके से अपनी बहन को फोन कर मदद मांगी और व्हाट्सएप पर अपनी लाइव लोकेशन भेज दी। बहन ने पहले स्थानीय स्तर पर पुलिस से संपर्क किया, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक मामला पहुंचाया। इसके बाद आयोग के हस्तक्षेप पर मिशन मुक्ति फाउंडेशन, एनएचआरसी की टीम और समस्तीपुर पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर 105 युवक-युवतियों को मुक्त कराया। हालांकि छापेमारी की भनक लगते ही अंधेरे का फायदा उठाकर गिरोह से जुड़े कई लोग ठिकानों से फरार हो गए, जिससे आशंका है कि अभी भी कई महत्वपूर्ण कड़ियां पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।


जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने युवाओं के अभिभावकों को विश्वास में लेने के लिए मुसापुर, धरमपुर, दुधपुरा समेत कई जगहों पर किराये के मकानों को छात्रावास बताकर दिखाया था। परिजनों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनके बच्चे सुरक्षित वातावरण में रहकर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे और जल्द ही सरकारी या निजी क्षेत्र में नौकरी पा जाएंगे। यही कारण रहा कि असम, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के सैकड़ों युवक-युवतियां इस जाल में फंसते चले गए। मामला यह भी उजागर करता है कि बेरोजगारी और आर्थिक तंगी का फायदा उठाकर किस प्रकार युवाओं के सपनों का सौदा किया जा रहा था।

सोशल मीडिया बना ठगी का सबसे बड़ा हथियार :
गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ग्रुप बनाकर आकर्षक विज्ञापन और सरकारी नौकरी संबंधी पोस्ट डालकर युवाओं को निशाना बनाता था। सरकारी विभागों और प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने का दावा किया जाता था। संपर्क करने वाले युवाओं को इंटरव्यू और ट्रेनिंग की प्रक्रिया बताकर समस्तीपुर बुलाया जाता था। यहां पहुंचने के बाद उनसे ट्रेनिंग किट के नाम पर 25 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने गेलवे नाम से कंपनी का पंजीकरण भी करा रखा था तथा जीएसटी नंबर लेकर अपने कारोबार को वैध दिखाने का प्रयास किया था।

हजार की किट, वसूले जाते थे 25 हजार रुपये :
युवाओं को जो तथाकथित ट्रेनिंग किट दी जाती थी, उसमें काॅसमेटिक और अन्य सामान्य उपयोग की वस्तुएं होती थीं। बाजार में इनकी कुल कीमत लगभग एक हजार से डेढ़ हजार रुपये के आसपास बताई जा रही है, लेकिन इसके बदले युवाओं से 25 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। इतना ही नहीं, रहने और खाने के नाम पर अलग से पैसे लिए जाते थे। बाद में युवाओं को निर्देश दिया जाता था कि वे इन उत्पादों को बेचें और नए लोगों को जोड़ें।
पुलिस के हाथ लगी ठगी की पूरी स्क्रिप्ट :
छापेमारी के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। इनमें एक ऐसी सूची भी शामिल है, जिसमें संभावित शिकार बनाए जाने वाले लोगों के नाम, मोबाइल नंबर और उनसे बातचीत करने की रणनीति तक लिखी हुई थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क कितने राज्यों में फैला हुआ है और अब तक कितने लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की जा चुकी है। 105 युवक-युवतियों की बरामदगी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इतने बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों से युवाओं को लाकर महीनों तक रखा गया और स्थानीय स्तर पर इसकी भनक क्यों नहीं लगी। फिलहाल मुक्त कराए गए सभी युवक-युवतियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पूरे नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश जारी है। गुरुवार की देर शाम मुफस्सिल थाने में इससे संबंधित प्राथमिकी दर्ज की गयी।
यहां देखें SP का बयान :

