नौकरी के नाम पर बंधक बने लड़के-लड़कियों से पूछताछ के लिये पहुंचे SP, युवक ने कहा- “मामा के गुजरने पर भी नहीं जाने दिया गया घर”

समस्तीपुर : गेलवे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को झांसे में लेकर बंधक बनाकर रखने और उनसे लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में 105 युवक-युवतियों की बरामदगी के बाद एसपी अरविंद प्रताप सिंह स्वयं मुफस्सिल थाना पहुंचे और मामले की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने रेस्क्यू किए गए युवक-युवतियों से बातचीत कर पूरी घटना की जानकारी हासिल की। वहीं गिरोह के सरगना से जुड़े हिरासत में लिए गए नौ आरोपियों से भी अलग-अलग पूछताछ की गई। आरोपितों में 6 युवती व 3 युवक है। एसपी ने पीड़ित युवक-युवतियों से यह जानने का प्रयास किया कि उन्हें किस माध्यम से नौकरी का लालच दिया गया, उनसे कितनी राशि ली गई और समस्तीपुर लाने के बाद उनके साथ किस प्रकार का व्यवहार किया गया।

कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें कृषि विभाग में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था। यहां पहुंचने के बाद उनसे ट्रेनिंग, रहने और खाने के नाम पर मोटी रकम वसूली गई। एसपी ने मुफस्सिल थानाध्यक्ष अजीत प्रसाद सिंह को निर्देश दिया कि सभी पीड़ितों का विस्तृत बयान दर्ज किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी ओर पुलिस ने गिरोह के सरगना से जुड़े हिरासत में लिए गये नौ लोगों से घंटों पूछताछ की। उनसे संगठन के संचालन, अन्य राज्यों से युवाओं को बुलाने की प्रक्रिया, वसूली गई राशि और फरार आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई गई। पूछताछ के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की चर्चा है, जिसके आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

मामा के गुजरने पर भी नहीं जाने दिया गया घर :
आसाम के रहने वाले एक युवक रवि कुमार (काल्पनिक नाम) ने आपबीती बताते हुए बताया कि उसके जान पहचान की एक लड़की ने फेसबुक पर उसे मैसेज किया और सरकारी नौकरी का लालच दिया। नौकरी की लालच में वह पिछले महीने ही समस्तीपुर आया था। जहां उसने उक्त लड़की के माध्यम से 25 हजार रुपये जमा किये। इस बीच ट्रेनिंग के नाम पर उसे एक मकान में रखा गया। इस बीच उसके मामा गुजर गये। उसने जब घर जाने की इच्छा जतायी तो उसे डराया-धमकाया गया।

युवक ने बताया की वह रो-रोकर घर जाने की गुहार लगाता रहा लेकिन उसे घर जाने नहीं दिया गया। युवक ने बताया कि हर दिन उन लोगों को बस दो टाइम ही खाना दिया जाता था। वह खाना भी काफी निम्न स्तर का होता था। सुबह 10 बजे और रात के 10 बजे उन लोगों को खाना परोसा जाता था, ज्यादा मांगने पर गाली-गलौज किया जाता था। रात को सभी का फोन कब्जे में ले लिया जाता था, और दिन में फोन देकर दोस्तों व परिचितों को फोनकर नौकरी का झांसा देकर बुलाने के लिये दबाव दिया जाता था। बातचीत के दौरान फोन को लाउडस्पीकर पर रखने का निर्देश था।

10 नाबालिग लड़के और 29 नाबालिग लड़कियां शामिल :
एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि रेस्क्यू किये गये 105 लोगों में 10 नाबालिग लड़कों और 29 नाबालिग लड़कियां शामिल है। इनमें कई लोग असम, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों के रहने वाले हैं। उन्हें नौकरी दिलाने और अच्छी कमाई का सपना दिखाकर समस्तीपुर बुलाया गया था। जांच के दौरान कई पीड़ितों ने खुलासा किया कि उनसे चेन मार्केटिंग के जरिए सामान बेचवाया जाता था, लेकिन कई महीनों से उन्हें कोई भुगतान नहीं किया गया था। इतना ही नहीं, जब कुछ लोगों ने घर जाने की इच्छा जताई तो उन्हें जाने की अनुमति भी नहीं दी गई। कई युवाओं के मोबाइल फोन अपने कब्जे में रख लिये गये थे और उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। पुलिस अब यह जांच कर रही है की उक्त गेलवे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी रजिस्टर्ड है या नहीं, इसकी भी जांच होगी। वहीं कंपनी को सील करने की प्रक्रिया भी की जाएगी।
SP ने क्या कुछ कहा, देखें वीडियों…



