लालू को किडनी देने वाली बेटी रोहिणी का सरनेम आचार्य क्यों रखा गया, यादव क्यों नहीं ?
राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव को उनकी बेटी रोहिणी आचार्य की एक किडनी सिंगापुर में ट्रांसप्लांट कर दी गई है। ऑपरेशन सफल रहा है और बिहार में दोनों की सलामती के लिए दुआ और हवन का दौर चल रहा है। रोहिणी के अपने पिता लालू को किडनी देने के फैसले की हर तरफ तारीफ हो रही है। लोग इसे बेटी और बाप के प्यार भरे रिश्ते से जोड़कर देख रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि लालू यादव परिवार की दूसरी बेटी रोहिणी का सरनेम आचार्य क्यों है ? मीसा भारती को छोड़ दें तो लालू की बाकी 5 बेटियों के नाम में शादी से पहले और दोनों बेटों के नाम में सरनेम यादव ही है।
यह कहानी उस दौर की है जब लालू ना मुख्यमंत्री थे और ना आरजेडी के अध्यक्ष। लेकिन ये कहानी बताती है कि लालू किस कदर खुशमिजाज और लोगों का मन जीत लेने वाले अदाकार थे। तो जानिए रोहिणी का नाम रोहिणी यादव के बदले रोहिणी आचार्य रखे जाने का वो राज जो मीडिया में आज तक किसी ने नहीं बताया होगा और लालू-राबड़ी परिवार के बाहर बहुत कम लोगों को पता होगा।

रोहिणी का जन्म ऑपरेशन से हुआ था। ऑपरेशन किया था पटना की बहुत मशहूर और कद्दावर महिला मामलों की डॉक्टर कमला आचार्य ने। रोहिणी लालू-राबड़ी का दूसरा बच्चा थीं। डॉक्टर कमला आचार्य लालू यादव को बहुत मानती थीं। ऑपरेशन सफल रहा तो फीस देने की बात उठी। लालू ने कहा कि फीस ले लीजिए। कमला आचार्य अड़ गईं कि नहीं, आपसे क्या फीस लेना। लालू भी जिद पर अड़े तो कमला आचार्य ने कहा कि अगर आप कुछ देने ही चाहते हैं तो इस बेटी को मेरा सरनेम दे दीजिए। यही मेरी फीस होगी और यही मेरा सौभाग्य होगा।

नक्षत्र से नाम हुआ रोहिणी और महिला डॉक्टर के सरनेम से मिला आचार्य
हाजिरजवाबी और लोगों का दिल जीतने के हुनरमंद लालू यादव ने फौरन तय कर दिया कि ऐसा ही होगा। दूसरी बेटी का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था इसलिए नाम रोहिणी रखा गया और डॉक्टर कमला के सरनेम से आचार्य लेकर पूरा नाम तय हुआ रोहिणी आचार्य। लालू की बाकी बेटियों का नाम मीसा भारती, चंदा यादव, रागिनी यादव, हेमा यादव, अनुष्का यादव, राजलक्ष्मी यादव है। बेटों का नाम तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव है। सबके नाम में यादव है बस रोहिणी को छोड़कर क्योंकि आचार्य सरनेम लालू-राबड़ी परिवार से बाहर का है।
किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन से कुछ दिन पहले हिन्दुस्तान से बातचीत में रोहिणी यादव ने कहा- मेरा सरनेम एक-दूसरे के प्रति प्यार और सम्मान का प्रतीक है। मुझे गर्व है पापा पर जो कमला आंटी को सम्मान देने से पीछे नहीं हटे। रोहिणी ने कहा कि मेरे पिता ने सभी को सम्मान दिया लेकिन लोग उनको लेकर खूब झूठ-फरेब फैलाते रहे। फिर वो कहती हैं- लोगों का काम है अफवाह फैलाना।

अपने पिता लालू यादव को किडनी देने के फैसले पर रोहिणी कहती हैं- किडनी दान करने का साहसिक काम हमारे देश की मामूली जनता ही कर सकती है। खास लोग किसी की मजबूरी या गरीबी खरीद सकते हैं या खास लोगों को कभी जरूरत ही नहीं पड़ी होगी, कभी बीमार हुए ही नहीं होंगे। लालू के शरीर में अब रोहिणी की एक किडनी काम करेगी। दुनिया में ऐसा करने वाली गिनी-चुनी बेटियों में वो शामिल हो गई हैं। देश में बाप-बेटी के रिश्ते की गहराई को जब भी नापा जाएगा, रोहिणी का नाम भी उसमें शामिल होगा।





