समस्तीपुर :- चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विपक्षी एकता की मुहिम पर करारा हमला बोला है। पीके ने कहा कि नेताओं के साथ बैठकर चाय पीने से विपक्षी एकता नहीं होती है। विपक्षी एकता के लिए विजन चाहिए। बिना सीट शेयरिंग फॉर्मूले के मोर्चेबंदी संभव नहीं है। बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर नीतीश कुमार देश भर के विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर बीजेपी विरोधी गठबंधन से जुड़ने की अपील कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार में जन सुराज पदयात्रा निकाल रहे हैं। फिलहाल वे समस्तीपुर जिले के दौरे पर हैं। इस दौरान शुक्रवार को मोरवा के बनवीरा गांव में मीडिया से बातचीत के क्रम में पीके ने सीएम नीतीश की विपक्षी एकता की मुहिम पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि नेताओं के आपस मिलने, साथ में बैठकर चाय पीने और प्रेस वार्ता करने से विपक्षी एकता अगर होती, तो आज से दस साल पहले यह काम हो गया होता। इसका कोई मतलब नहीं है।
पीके ने कहा, “आप (नीतीश कुमार) बंगाल गए, ममता बनर्जी से मिले, दोनों ने मिलकर बयान जारी किया। उससे लोगों पर क्या असर पड़ा? ऐसा तो है नहीं कि ममता बनर्जी कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में लड़ने के लिए जगह देने पर सहमत हो गईं। या ऐसा भी नहीं है कि कांग्रेस ममता के भरोसे पूरा बंगाल छोड़ देगी।”
प्रशांत किशोर ने कहा कि पहले नीतीश कुमार को बिहार में लोकसभा चुनाव का सीट शेयरिंग फॉर्मूला बताना चाहिए। बिहार में जेडीयू, आरजेडी एवं कांग्रेस कितनी सीटों पर लड़ेगी और मांझी एवं लेफ्ट पार्टियों को कितनी सीटें मिलेंगी। नीतीश बिहार का फॉर्मूला जारी कर देंगे, फिर दूसरे राज्यों में जाएंगे तो उन्हें अहमियत मिलेगी। बिहार में भाकपा माले का स्ट्राइक रेट पिछले विधानसभा चुनाव में जेडीयू से ज्यादा रही है। क्या नीतीश भाकपा माले के लिए अपनी सीटें छोड़ देंगे? नीतीश-तेजस्वी का अपना घर ठिकाने पर नहीं है, वो आदमी पूरी दुनिया में घूम रहा है। इसका कोई फायदा नहीं होने वाला है।
प्रशांत किशोर ने बीजेपी पर भी करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में बीजेपी की कमान ऐसे व्यक्ति के हाथों में है, जिनके बाबूजी पहले लालू के मंत्री थे। फिर वो नीतीश सरकार में मंत्री हुए, फिर मांझी सरकार में मंत्री बने। आजकल उनका बेटा बीजेपी का उद्धार करने निकल गया है। यही तो हालात हैं। बीते 30 सालों में जो विधायक और सांसद बने हैं, उनमें गिने-चुने 1200 से 1500 परिवार के हैं। जिस दल की हवा चलती है, वे उसमें आ जाते हैं। बीजेपी जैसी पार्टी को भी कोई नया आदमी नहीं मिला है। वो भी आरजेडी और जेडीयू जैसी पार्टियों के नेताओं को अपने में समेटे हुए है।
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