समस्तीपुर/मोरवा :- चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सीएम नीतीश और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। 10 लाख नौकरी देने के वादे पर उन्होंने कहा कि तेजस्वी के बाबू जी का राजतंत्र नहीं है, जो एक साइन पर नौकरी मिल जाए। उन्हें किसी विषय का कोई ज्ञान नहीं है।
सीएम नीतीश कुमार को लेकर कहा कि जिसके अपने घर का ठिकाना है नहीं। वह आदमी पूरे दुनिया में घूमेगा तो वो न घर का होगा ना बाहर का बचेगा। नेताओं के साथ चाय पीने से विपक्षी एकता नहीं होती।
इस दौरान उन्होंने भाजपा पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में भाजपा का कुछ नहीं है। प्रधानमंत्री के चेहरे पर वोट मिलता है। प्रदेश में कोई ऐसे नेता नहीं हैं, जिनके चेहरे पर 5 वोट भी मिले। प्रशांत किशोर जन सुराज पदयात्रा के 223वें दिन शुक्रवार को समस्तीपुर के मोरवा प्रखंड में थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पक्ष-विपक्ष दोनों पर निशाना साधा।
प्रशांत किशोर ने कहा कि तेजस्वी यादव चुनाव में आएं और 10 लाख नौकरी देने का वादा किया और कहा कि 1 साइन करेंगे और आपको नौकरी मिल जाएगी। किसी कैबिनेट के पास ये अधिकार नहीं है कि 1 साइन पर नौकरी मिल जाएगी। ये उनके बाबू जी का राजतंत्र नहीं है जो 1 साइन पर नौकरी मिल जाएगी।
प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि नेताओं और दलों के साथ में बैठकर चाय पीने से और प्रेस वार्ता करने से विपक्षी एकता नहीं होती। अगर होनी होती तो आज से 10 साल में यह काम हो गया होता। नीतीश कुमार जो कर रहे हैं इसका कोई मतलब नहीं बनता है।
नीतीश कुमार बिहार में सीटों का ही फार्मूला जारी कर दें। नीतीश कुमार बता दें कि बिहार में जदयू, कांग्रेस, आरजेडी और उनके अन्य जो सहयोगी दल हैं। वो कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। आगे उन्होंने कहा कि जिसके अपने घर का ठिकाना है नहीं! वह आदमी पूरे दुनिया में घूमेगा तो वो न घर का होगा ना बाहर का बचेगा।
प्रशांत किशोर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के चेहरे पर जो वोट मिलती है। बस वही वोट भाजपा को मिल रही है। बिहार में भाजपा के किसी नेता के नाम पर 5 वोट भी नहीं है। बिहार में जिस दल का हवा उड़ती है, सब नेता उसी में आ जाते हैं। भाजपा को बिहार में आज जो वोट मिलता है। वो मोदी जी के चेहरे के नाम पर, हिंदुत्व के नाम पर, राम मंदिर के नाम पर और हिंदू-मुसलमान के नाम पर मिलता है।
उन्होंने कहा कि भाजपा का बिहार में कुछ नहीं है। आज बीजेपी की हालत ऐसी है कि बीजेपी की कमान बिहार में ऐसे व्यक्ति के पास है जिनके बाबूजी पहले लालू प्रसाद के मंत्री थे। फिर वो नीतीश के मंत्री हुए। इसके बाद वह मांझी जी के मंत्री हुए। आजकल उनका बेटा बीजेपी का उद्धार करने निकला है।
पिछले 30 सालों में बिहार में जितने लोग MLA और MP बने हैं, चाहे वह जिस भी दल से बने हो। वो पूरे बिहार में 1200 से 1500 परिवार के लोग ही यहां MLA-MP बने हैं। भाजपा को भी बिहार में कोई नया आदमी नहीं मिल रहा है। उनको भी वही व्यक्ति मिला है, जिनके बाप-दादा पहले किसी और दल में थे। बिहार में भाजपा अभी नेता खोज ही रही है। कोई नेता उनको यहां मिल जाएं, जिसके नाम पर बिहार में चुनाव लड़ा जा सके। इसी के फिराक में रहते हैं।
आगे प्रशांत किशोर ने कहा कि क्या नीतीश कुमार अपनी सीट छोड़कर CPI(ML) को देंगे? CPI(ML) की जीत का औसत नीतीश कुमार से ज्यादा रहा है। नीतीश कुमार की पार्टी 110 सीटों पर लड़ कर 42 सीट पर जीती हैं। CPI(ML) 17 सीटों से लड़कर 12 एमएलए जीती हैं। इस हिसाब से उनको को ज्यादा सीट मिलनी चाहिए, तो नीतीश कुमार अपनी सीट छोड़ देंगे?
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