नेपाल रेलवे का इतिहास 85 साल पुराना है। 20 दिसंबर 1937 को जयनगर से जनकपुरधाम होते हुए बिजलपुरा तक नैरो गेज रेल चली थी। रेल चलाने का उद्देश्य नेपाल की जंगल से सखुआ लकड़ी की ढुलाई करना था। उस समय भारत में बिट्रिश का राज्य और नेपाल में राजशाही था।
दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह ने नेपाल राजा को जयनगर में नेपाली स्टेशन के लिए 100 साल के लीज पर जमीन दी। इसके बाद स्टेशन का निर्माण हुआ। इस दौरान वर्ष 1961 तक सिर्फ माल ढुलाई का ही कार्य होता रहा।
नेपाल में वर्ष 1961 के विवाह पंचमी के दिन यानी आज से 61 साल पहले विवाह पंचमी के दिन ही जयनगर से जनकपुरधाम से बिजलपुरा तक यात्री सेवा बहाल हुई थी। इससे यात्रियों को आने-जाने में काफी सुविधा मिली।
यात्री सेवा बहाल करने के लिए नेपाल रेलवे को भारत सरकार ने तीन स्टीम इंजन व कोच दिया। स्टीम इंजन का नाम राम, सीता, गुहेश्वरी के नाम से था। स्टीम इंजन के दौरान ट्रेन की स्पीड काफी कम थी।
1994 यानी 28 साल पहले भारत सरकार ने दो डीजल इंजन तथा कोच दिया। राइट्स कंपनी के एम. वर्गिश के नेतृत्व में इंजीनियर तथा लोको पायलट एक साल रहकर नेपाली रेलवे कर्मचारी को प्रशिक्षण दिया। जिसके बाद ट्रेन की स्पीड में सुधार आया।
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