बिहार में एनडीए के घटक दलों के बीच अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में सब कोटा को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन द्वारा आरक्षण नीति की समीक्षा और उप-वर्गीकरण के समर्थन के बाद यह राजनीतिक बहस गरमा गई है। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इसका तीखा विरोध किया है।
जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने कहा है कि आरक्षण की समीक्षा का मतलब इसे खत्म करना नहीं है, बल्कि इसका लाभ उन सबसे कमजोर और ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों तक पहुंचाना है, जो अब तक पीछे रह गए हैं। उन्होंने कहा, ‘हम SC-ST के सब-कैटेगराइज़ेशन के पक्ष में हैं। हम केवल SC-ST आरक्षण की समीक्षा की बात कर रहे हैं, ताकि इसका लाभ सबसे वंचित लोगों तक पहुंच सके। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी दिशा में फैसला दिया है।’ दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 1 अगस्त 2024 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्यों को SC और ST वर्ग के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी थी। इसका उद्देश्य इन वर्गों में अपेक्षाकृत अधिक पिछड़ी जातियों को आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करना था। इसे कोटे के भीतर कोटा के तौर पर देखा गया।
संतोष कुमार सुमन ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक अन्याय और ऐतिहासिक वंचना को दूर करने के उद्देश्य से बनी थी। यह पूछना सामाजिक न्याय की मांग है कि जिसके लिए आरक्षण बना था, उसे उसका लाभ वास्तव में कितना मिला? सुमन ने कहा कि बिहार में अनुसूचित जाति के भीतर कई ऐसे समुदाय आज भी हैं, जो शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व के मामले में बेहद पीछे हैं। पिछले लगभग आठ दशकों में आरक्षण व्यवस्था का लाभ किस समुदाय तक कितना पहुंचा, इसका कोई व्यापक एसेसमेंट क्यों नहीं होना चाहिए?
HAM (S) के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा कि पार्टी हमेशा से SC-ST के भीतर सब कोटा की समर्थक रही है। उन्होंने दावा किया कि दलितों को मिलने वाले आरक्षण का लाभ मुख्य रूप से रविदास और पासवान जैसे प्रमुख SC समूहों तक सीमित रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिहार में मुसहर समुदाय से कोई IAS अधिकारी क्यों नहीं है? HAM (S) के आरक्षण की समीक्षा की मांग करने का यह सही समय है। पार्टी का तर्क है कि मौजूदा महादलित व्यवस्था के बावजूद SC समुदायों के बीच असमानता बनी हुई है।
बिहार में 2008 में 22 SC समूहों में से 18 को महादलित श्रेणी में रखा गया था, लेकिन इससे आंतरिक असमानताएं खत्म नहीं हुईं। बता दें कि मांझी परिवार मुसहर समुदाय से आता है। बिहार में मुसहर और उनसे जुड़े भुइयां समुदाय की आबादी राज्य की SC आबादी का करीब चार प्रतिशत बताई जाती है। वहीं रविदास की हिस्सेदारी करीब 5.3 प्रतिशत और पासवान की करीब 5.2 प्रतिशत है।
दूसरी ओर, LJP (RV) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले और सब कोटा का विरोध किया है। उन्होंने शुक्रवार को पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि जो लोग आरक्षण की समीक्षा की बात करते हैं, या उसकी सोच भी रखते हैं, वे देश से आरक्षण को समाप्त करना चाहते हैं। चिराग ने कहा कि आरक्षण की समीक्षा करने के मतलब उस व्यवस्था से लोगों को हटाया जाना और इसके दायरे को कम करना है। समीक्षा की मांग उन लोगों के सोच की शुरुआत है, जो इस व्यवस्था को समाप्त करना चाहते हैं।
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