बेटा हुआ तो थमा दी बेटी, 3 साल बाद DNA टेस्ट में खुला अस्पताल का खेल, हाई कोर्ट बोला- रद्द करो लाइसेंस, DM-SP खुद करें जांच

बिहारशरीफ के एक निजी क्लीनिक नवजीवन शिशु अस्पताल से नवजात के गायब होने और कथित तौर पर उसकी तस्करी की आशंका से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने पुलिस जांच में हुई शुरुआती लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। क्रिमिनल रिट क्षेत्राधिकार मामला संख्या 3338/2025 की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति रमेश चंद मालवीय की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच में तेजी लाने और अस्पताल के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
नालंदा एसपी का कोर्ट में खुलासा
अदालत को नालंदा के एसपी ने बताया कि अस्पताल के प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार पर लगाए गए आरोप जांच में प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। पुलिस द्वारा जब्त दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि 26 मार्च 2023 को अस्पताल में 3.450 किलोग्राम वजन के एक जीवित पुत्र का जन्म हुआ था। जन्म के बाद नवजात करीब 17 दिनों तक आईसीयू में भर्ती रहा। इस दौरान परिजनों को उससे मिलने की अनुमति नहीं दी गई।


अस्पताल में बच्चा बदल रिकॉर्ड में Male को Female लिख दिया
जांच के दौरान अस्पताल के प्रवेश रजिस्टर में भी गंभीर अनियमितता मिली। पुलिस के अनुसार, रजिस्टर में ‘मेल’ शब्द में बदलाव कर उसके आगे अक्षर जोड़कर उसे ‘फीमेल’ किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि एनआईसीयू में सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था नहीं थी। वहां सुरक्षा गार्ड की तैनाती भी नहीं थी और मरीजों के आने-जाने से संबंधित रजिस्टर का रखरखाव भी संतोषजनक नहीं पाया गया।

एफएसएल रिपोर्ट दस दिनों में देने का आश्वासन
महत्वपूर्ण दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजने में देरी और पुलिस की ओर से पहले दी गई जानकारी को लेकर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई। इसके बाद एसपी ने बताया कि विवादित रजिस्टर को पटना स्थित एफएसएल के हस्तलेखन विभाग में भेज दिया गया है। सुनवाई के दौरान विभाग के निदेशक भी ऑनलाइन अदालत में मौजूद रहे और उन्होंने दस दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। एसपी ने अदालत को यह भी बताया कि मामले की जांच में पहले लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच को विशेष तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है और इसकी प्रतिदिन निगरानी की जाएगी।

अस्पताल का लाइसेंस निलंबित करने पर जोर
सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘पिंकी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में संबंधित अस्पताल के लाइसेंस पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। पुलिस जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बावजूद अस्पताल के लाइसेंस के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।

2 हफ्ते में डीएम को एक्शन का निर्देश
कोर्ट की सख्ती के बाद एसपी ने अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई के लिए नालंदा के जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेज दिया है। हाईकोर्ट ने डीएम को निर्देश दिया कि मामले को प्राथमिकता देते हुए अधिकतम दो सप्ताह में कानून के अनुरूप उचित आदेश पारित करें। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी। उस दिन नालंदा के एसपी को अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

