बिहार में सैकड़ों कांस्टेबल हिंदी की परीक्षा भी नहीं कर पाए पास, हाथ से निकला प्रमोशन

बिहार पुलिस विभाग में प्रमोशन की विभागीय परीक्षा के नतीजे कई सिपाहियों के लिए निराशा लेकर आए हैं. बड़ी संख्या में ऐसे सिपाही हैं जो केवल हिन्दी विषय में पास नहीं हो सके. इसी वजह से उनका प्रमोशन रुक गया और वे जमादार (ASI) नहीं बन पाए. विभाग के अनुसार, प्रमोशन के लिए हिन्दी की परीक्षा पास करना अनिवार्य है. जो कर्मचारी इसमें सफल नहीं हुए, उन्हें अभी अपने मौजूदा पद पर ही काम करना होगा.
391 सिपाही घोषित हुए अयोग्य
विभागीय जानकारी के अनुसार, राज्यभर में आयोजित प्रमोशन परीक्षा के बाद कुल 391 सिपाहियों को अयोग्य घोषित किया गया है. इनमें 200 से अधिक सिपाही केवल हिन्दी विषय में फेल हो गए. वहीं, 100 से ज्यादा ऐसे सिपाही भी हैं जिनके खिलाफ पहले से विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है. इसी कारण उन्हें भी प्रमोशन के लिए योग्य नहीं माना गया.

जहां कुछ सिपाहियों को निराशा मिली, वहीं बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने सफलता भी हासिल की है. पूरे बिहार में 1545 सिपाही विभागीय परीक्षा पास कर एएसआई (जमादार) पद पर प्रमोट हुए हैं. अब ये अधिकारी विभिन्न मामलों की जांच की जिम्मेदारी संभालेंगे. मुजफ्फरपुर जिला फोर्स के 41 पीटीसी सिपाहियों को भी जमादार के पद पर प्रमोट किया गया है. विभाग ने इन सभी को एएसआई कैटेगरी का वेतनमान देने की मंजूरी भी दे दी है.

फेल होने वालों को मिलेगा एक और मौका
बिहार पुलिस विभाग ने साफ किया है कि जो सिपाही इस बार परीक्षा पास नहीं कर सके हैं, उन्हें अगली विभागीय परीक्षा में फिर से शामिल होने का अवसर मिलेगा. अगर वे अगली बार हिन्दी की परीक्षा पास कर लेते हैं और अन्य सभी शर्तें पूरी करते हैं, तो उन्हें प्रमोशन मिल सकता है. तब तक उन्हें अपने वर्तमान पद पर ही सेवा देनी होगी.

क्यों जरूरी है हिन्दी की परीक्षा?
विभागीय नियमों के अनुसार, जमादार (एएसआई) बनने के लिए हिन्दी विषय की परीक्षा पास करना अनिवार्य है. अगर कोई सिपाही इसमें सफल नहीं होता, तो उसका प्रमोशन रुक जाता है. इतना ही नहीं, ऐसे कर्मचारियों को एसीपी (Assured Career Progression) और एमएसीपी (Modified Assured Career Progression) जैसी सेवा संबंधी फाइनेंशियल और प्रमोशनल स्कीम का लाभ भी नहीं मिल पाता. इसलिए विभागीय परीक्षा में हिन्दी विषय को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

