बिहार के दूसरे एम्स अस्पताल के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पूर्व के फैसले पर कायम हैं। आरजेडी से नाता तोड़ बीजेपी से गठबंधन करने के बावजूद सीएम नीतीश ने अपना इरादा नहीं बदला है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने मंगलवार को पटना में सीएम नीतीश से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी मांग को दोहराते हुए शोभन में ही दरभंगा के शोभन में ही एम्स का निर्माण कराने की बात कही।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा दो दिवसीय बिहार दौरे पर आए और दरभंगा में उन्होंने एम्स के लिए प्रस्तावित जमीनों का निरीक्षण किया। मंगलवार को पटना से दिल्ली लौटने से पहले उन्होंने सीएम नीतीश से मुलाकात की। चंद्रा आईआईटी दिल्ली से पासआउट सिविल इंजीनियर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बात को सुना और कहा कि वे दिल्ली में तकनीकी विशेषज्ञों एवं अन्य अधिकारियों के साथ इस माले पर चर्चा करेंगे।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सोमवार को बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी से मुलाकात की और उनके साथ इस मुद्दे पर चर्चा की थी। मामले से परिचित एक अधिकारी ने कहा कि दरभंगा की उच्चस्तर से शोभन में ही एम्स बनाने का निर्णय लिया जाएगा। हमें इसकी उम्मीद है क्योंकि केंद्रीय टीम शोभन का दौरा करने के बाद संतुष्ट नजर आई।
अपूर्व चंद्रा ने दरभंगा में शोभन के साथ ही डीएमसीएच अस्पताल का भी दौरा किया। यहां राज्य सरकार ने पहले (2021 में) एम्स बनाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, जब मीडिया ने उनसे शोभन में एम्स निर्माण की संभावनाओं के बारे में पूछा तो उन्होंने कुछ नहीं कहा।
नीतीश कैबिनेट ने 1,030 बेड क्षमता वाले डीएमसीएच को 2500 बेड वाले अस्पताल में अपग्रेड करने के लिए 3115 करोड़ रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। ऐसे में अब केंद्र सरकार के पास दरभंगा में एम्स निर्माण के लिए शोभन ही एकमात्र विकल्प रह गया है।
हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दरभंगा एम्स परियोजना में देरी होगी, क्योंकि शोभन में जमीन बहुत नीची है। यहां पर लेवल बराबर करने के लिए उसे परत दर परत भरना पड़ेगा। एक केंद्रीय टीम ने बीते अप्रैल महीने में इस साइट को अनुपयुक्त बताते हुए खारिज कर दिया था और राज्य सरकार से वैकल्पिक भूमि की मांग की थी।
पिछले साल 26 मई को तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने एक पत्र में बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित साइट से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र किया गया था। इसमें कहा गया कि शोभन का क्षेत्र निचला है, इसमें व्यापक मिट्टी भरने की जरूरत पड़ेगी। जमीन के नीचे बहुत पानी है, ऐसे में इंजीनियरिंग चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
पांच सदस्यीय केंद्रीय टीम के सदस्यों ने यह भी कहा कि शोभन प्लॉट के लिए मजबूत नींव की आवश्यकता होगी क्योंकि अंतर्निहित मिट्टी काली-कपासी है, जो बारिश में फैलने और गर्मियों में सिकुड़ सकती है। इसके अलावा लेवल बराबर करने के लिए सात मीटर मिट्टी भरने की जरूरत पड़ेगी।
बिहार सरकार ने पिछले साल दिसंबर में शोभन में भूमि भराई करने पर सहमति जताई थी। भूमि भराई और चारदीवारी के निर्माण के लिए 309 करोड़ रुपये आवंटित करने के बाद निविदाएं जारी की गईं। राज्य ने चार-लेन सड़क का निर्माण करके कनेक्टिविटी में सुधार करने और क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था करने के लिए भी प्रतिबद्धता जताई। केंद्र ने उस समय राज्य सरकार से शोभन में प्रस्तावित एम्स-दरभंगा पर चर्चा की बात कही थी। इसके बाद स्वास्थ्य सचिव ने सोमवार को साइट का दौरा किया।
दरभंगा में साइट विजिट के दौरान अपूर्व चंद्रा के साथ बिहार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) प्रत्यय अमृत, स्वास्थ्य सचिव संजय कुमार सिंह, एम्स-दरभंगा के कार्यकारी निदेशक डॉ. माधवानंद और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव अंकिता मिश्रा बुंदेला भी मौजूद रहे। मंगलवार शाम को दिल्ली रवाना होने से पहले चंद्रा ने बिहार संग्रहालय और स्वास्थ्य भवन का विजिट किया। साथ ही एम्स-पटना और राज्य स्वास्थ्य विभाग के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का भी दौरा किया।
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