बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि उनके कार्यकाल में थोक में शिक्षकों की भर्ती हुई है और आगे भी बहाली होगी। नीतीश ने कहा है कि पढ़ाने वाले शिक्षकों का वेतन भी बढ़ेगा लेकिन जो नहीं पढ़ाते हैं उनको नौकरी से निकाला भी जाएगा। मौलाना अब्दुल कलाम आजाद की जयंती के मौके पर आयोजित शिक्षक दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर से कहा कि जो नहीं पढ़ाते हैं, उनको बाहर किया जाए।
नीतीश ने कहा- “जहां भी जाता हूं लोग नौकरी की मांग करते हैं। मैंने अधिकारियों से बहाली के काम में तेजी लाने कहा है। 2005 से पहले कितने शिक्षक थे। हमने थोक में बहाली की है और आगे भी और भर्ती होगी। लेकिन मैं शिक्षकों और प्रोफेसरों से आग्रह करता हूं कि वो स्कूल-कॉलेज में पढ़ाएं। जो पढ़ाते हैं, उनको और मिलेगा लेकिन जो नहीं पढ़ाते हैं, उनको बाहर होना चाहिए।”
नीतीश कुमार ने लड़कियों की शिक्षा से जन्म दर में कमी की ओर ध्यान खींचते हुए बताया कि जब 2005 में वो मुख्यमंत्री बने तब बिहार में जन्म दर 4.3 था जो अब घटकर 2.9 हो गया है। उन्होंने बताया कि बिहार में लड़कियों को बच्चा क्लास से स्नातक की पढ़ाई तक 94100 रुपए की सहायता मिलती है। नीतीश ने कहा कि बिहार जैसा गरीब राज्य अपने बजट का 21 परसेंट शिक्षा पर खर्च कर रहा है जिसे हम 25 परसेंट तक ले जाने की सोच रखते हैं क्योंकि शिक्षा समाज की गड़बड़ी ठीक करने का प्रमुख जरिया है।
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