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BRC द्वारा हेडमास्टरों पर जबरन वेंडर थोपने का आरोप, खेल सामग्री खरीद में सिंडिकेट चलाने का आरोप, वाट्सएप ग्रुप का चैटिंग वायरल 

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समस्तीपुर/पटोरी : पटोरी प्रखंड के विद्यालयों में खेल सामग्री खरीद को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि विद्यालयों को खेल सामग्री खरीद के लिए मिली सरकारी राशि के खर्च में पटोरी बीआरसी द्वारा खुलेआम हस्तक्षेप किया जा रहा है। इसको लेकर क्षेत्र के कई प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है। नाम ना छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि यह न केवल विभागीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि विद्यालय शिक्षा समिति और विद्यालय स्तरीय क्रय समिति के अधिकारों का भी सीधा हनन है।

शिक्षकों के अनुसार शिक्षा विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि खेल सामग्री की खरीद विद्यालय स्तर पर गठित क्रय समिति द्वारा की जाएगी। समिति को यह अधिकार है कि वह विद्यालय की जरूरत और गुणवत्ता के आधार पर किसी भी उपयुक्त विक्रेता का चयन करे। लेकिन पटोरी में स्थिति इसके विपरीत बताई जा रही है। आरोप है कि बीआरसी से जुड़े कर्मियों द्वारा विद्यालयों पर एक विशेष एजेंसी से सामग्री खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। ‘ बीआरसी पटोरी एचएम ग्रुप ‘ में आईसीटी काॅर्डिनेटर सत्येंद्र कुमार विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को एक लिस्ट भेजते हुए संबंधित हेडमास्टर को शिक्षा भवन पटोरी पहुंचकर खेल सामग्री का उठाव करने का निर्देश दे रहे है। हालांकि हिंदुस्तान द्वारा सत्येंद्र कुमार से पक्ष जानने पर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी, और उन्होंने इससे पल्ला झाड़ लिया।

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इधर कई प्रधानाध्यापकों ने आरोप लगाया कि प्लेयर्स पैराडाइज नामक एजेंसी से खेल सामग्री खरीदने के लिए मौखिक और अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं, हेडमास्टरों को बीआरसी पहुंचकर सामग्री प्राप्त करने तथा उसका पूरा भुगतान करने के लिए भी कहा जा रहा है। शिक्षकों का दावा है कि संबंधित एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराई जा रही खेल सामग्री की गुणवत्ता अपेक्षाकृत कमजोर है, लेकिन प्रशासनिक दबाव के कारण अधिकांश विद्यालय वैकल्पिक विक्रेता चुनने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कोई विद्यालय अलग विक्रेता से खरीदारी करना चाहता है तो उसे अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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हेडमास्टरों ने बताया की पटोरी बीआरसी में कुछ शिक्षक प्रतिनियोजित हैं जो बेवजह कुछ हेडमास्टरों को टार्गेट कर उनपर दबाव बनाते है। बता दें कि शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के प्राथमिक, मध्य एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों को खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग राशि उपलब्ध कराई गई है। प्राथमिक विद्यालयों को 5 हजार रुपये, मध्य विद्यालयों को 10 हजार रुपये तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 25 हजार रुपये तक की राशि दी गई है।

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मामले में पूछे जाने पर पटोरी के बीईओ मनीष कुमार ने किसी भी प्रकार के दबाव या हस्तक्षेप से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सभी प्रधानाध्यापक स्वतंत्र हैं और वे अपनी आवश्यकता के अनुसार किसी भी वैध विक्रेता से खेल सामग्री खरीद सकते हैं। इधर शिक्षकों का कहना है कि यदि बीआरसी की कोई भूमिका नहीं है, तो फिर बीआरसी परिसर से सामग्री वितरण, प्रधानाध्यापकों को बुलाकर सामान उठाने के निर्देश और इससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर कैसे वायरल हो रहे हैं।

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