समस्तीपुर जिले के सभी मेडिकल स्टोर पर CCTV कैमरा लगाना अनिवार्य, दवा बिक्री की होगी कड़ी निगरानी, रिकॉर्डिंग 90 दिन रखनी होगी सुरक्षित

समस्तीपुर : जिले में दवाओं की अवैध बिक्री, बिना चिकित्सकीय पर्ची के एंटीबायोटिक और नशीली दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से संशोधित औषधि नियम 2026 के तहत रिटेल मेडिकल स्टोर में सीसीटीवी कैमरा लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके बाद दवा दुकानों में ग्राहकों को दवा देने की प्रक्रिया कैमरे की निगरानी में होगी। दवा काउंटर और बिक्री प्वाइंट पर लगाए गए सीसीटीवी से दवा की बिक्री की स्पष्ट रिकॉर्डिंग करनी होगी।
नए प्रावधान के अनुसार प्रत्येक रिटेल फार्मेसी संचालक को अपने प्रतिष्ठान में इस तरह सीसीटीवी लगाना होगा, जिससे दवा बिक्री की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड हो सके। सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। दवा की बिक्री में किसी तरह की अनियमितता सामने आने या जांच के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर संबंधित मेडिकल स्टोर से फुटेज की मांग कर सकते हैं। इससे विभाग को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस दवा की बिक्री किस परिस्थिति में और किस ग्राहक को की गई।


एंटीबायोटिक और नशीली दवाओं पर विशेष निगरानी :
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य ऐसी दवाओं की बिक्री पर निगरानी बढ़ाना है, जिनका इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित नियमों के तहत किया जाना जरूरी है। खासकर शेड्यूल एच, एच-1 और एक्स श्रेणी की दवाओं की बिक्री को लेकर निगरानी बढ़ाई जाएगी। इन श्रेणियों में कई एंटीबायोटिक, नींद की दवाएं, मानसिक रोगों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं और आदत डालने वाली (हैबिट-फार्मिंग) दवाएं शामिल हैं।विभाग का मानना है कि कई बार लोग चिकित्सकीय सलाह के बिना ही एंटीबायोटिक या अन्य नियंत्रित दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीद लेते हैं। इससे दवाओं के गलत इस्तेमाल के साथ-साथ एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी समस्या भी बढ़ सकती है।

वहीं कुछ दवाओं का अनधिकृत इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे में बिक्री प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग होने से दुकानदारों की जवाबदेही बढ़ेगी। जिला ड्रग इंस्पेक्टर शंभूनाथ ठाकुर ने बताया कि मंत्रालय के निर्देश के अनुसार जिले के दवा दुकानदारों को अपने प्रतिष्ठान में सीसीटीवी लगाने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि समस्तीपुर जिले में करीब दो हजार दवा दुकानें लाइसेंस प्राप्त हैं। इनमें कुछ दुकानों में पहले से ही सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। अब जिन दुकानों में व्यवस्था नहीं है, वहां भी निर्धारित प्रावधान के अनुसार सीसीटीवी लगाने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

जांच के दौरान मांगी जा सकेगी रिकॉर्डिंग :
नए प्रावधान के तहत सीसीटीवी सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था के लिए नहीं, बल्कि दवा बिक्री की निगरानी का महत्वपूर्ण माध्यम होगा। ड्रग इंस्पेक्टर जांच के दौरान किसी मेडिकल स्टोर की बिक्री से संबंधित फुटेज की मांग कर सकेंगे। फुटेज उपलब्ध नहीं कराने या रिकॉर्डिंग को निर्धारित अवधि तक सुरक्षित नहीं रखने की स्थिति में संबंधित दुकानदार से नियमों के तहत जवाब मांगा जा सकता है। बताया गया है कि यह प्रावधान सीधे ग्राहकों को दवा बेचने वाली रिटेल फार्मेसियों पर लागू होगा। थोक दवा विक्रेताओं को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। यानी जिन दुकानों से आम ग्राहक सीधे दवाएं खरीदते हैं, वहां बिक्री प्रक्रिया की निगरानी के लिए सीसीटीवी व्यवस्था जरूरी होगी।

दवा बिक्री में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद :
दवा दुकानों में सीसीटीवी लगाने से न केवल अवैध और अनियमित बिक्री पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि दवा कारोबार में पारदर्शिता भी बढ़ने की उम्मीद है। खासकर बिना पर्ची ऐसी दवाओं की बिक्री पर निगरानी रखना आसान होगा, जिनकी बिक्री चिकित्सकीय परामर्श या निर्धारित नियमों के तहत ही की जानी चाहिए। जिला ड्रग इंस्पेक्टर के अनुसार नए प्रावधान के प्रभावी क्रियान्वयन से दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने के साथ मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
बयान :
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश के अनुसार जिले के सभी रिटेल मेडिकल स्टोर संचालकों को दवा बिक्री स्थल पर सीसीटीवी लगाने के लिए कहा गया है। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाना और बिना पर्ची एंटीबायोटिक, नशीली एवं नियंत्रित दवाओं की बिक्री पर प्रभावी निगरानी रखना है। दुकानदारों को सीसीटीवी फुटेज निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखना होगा, जिसे जांच के दौरान विभाग द्वारा मांगा जा सकता है।
शंभूनाथ ठाकुर, जिला ड्रग इंस्पेक्टर, समस्तीपुर


