Samastipur

बाढ़ से थमा डूबे पंचायतों के परिसीमन का काम, समस्तीपुर जिले भर में 94.18 फीसदी ईबी डायरेक्शन इंट्री की प्रक्रिया पूरी

समस्तीपुर : गंगा नदी के जलस्तर में उफान और निचले इलाकों में जलजमाव के कारण जिले में पंचायतों के परिसीमन का काम प्रभावित हो गया है। खासकर मोहिउद्दीननगर और मोहनपुर प्रखंड की कई पंचायतों में फील्ड सर्वे और सीमांकन का काम बीच में ही अटक गया है। हालांकि, जिले के अधिकांश प्रखंडों में ईबी डाइरेक्शन इंट्री का काम पूरा कर लिया गया है। जिला पंचायती राज पदाधिकारी विष्णुदेव मंडल के अनुसार, अब तक 10 प्रखंडों ने शत प्रतिशत काम पूरा कर लिया है। वहीं अन्य प्रखंडों में कार्य अभी भी जारी है जिसे रविवार शाम तक हर-हाल में शत प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि रविवार की शाम 5 बजे तक जिले भर में 94.18 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलजमाव और आवागमन की समस्या के कारण शेष कार्य नहीं हो सका। जिले के सभी 20 प्रखंडों में परिसीमन की प्रक्रिया दो सितंबर से शुरू की गई थी। ईबी डायरेक्शन इंट्री का काम 10 सितंबर तक पूरा किया जाना था। लेकिन, बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने इसकी समय-सीमा बढ़ा दी थी। जिला पंचायती राज पदाधिकारी के अनुसार, प्रभावित इलाकों में स्थिति सामान्य होने के बाद फील्ड सर्वे और सीमांकन का काम फिर से गति पकड़ेगा।

346 पंचायतों के 1049 गांवों में चल रहा है काम :

जिले की 346 पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 1049 गांवों में ईबीएस डायरेक्शन इंट्री का काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत पंचायतों, वार्डों और अन्य ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं से संबंधित आवश्यक आंकड़ों और भौगोलिक स्थिति को दर्ज किया जा रहा है। बाढ़ के कारण सबसे अधिक परेशानी मोहिउद्दीननगर प्रखंड में सामने आ रही है, जहां कई निचले इलाकों में अब भी पानी जमा है। मोहिउद्दीननगर में अब तक 47.21 प्रतिशत व मोहनपुर में 65.58 प्रतिशत काम रविवार शाम 5 बजे तक पूरा किया गया है। जिला पंचायती राज पदाधिकारी ने बताया कि परिसीमन का कार्य राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार किया जा रहा है। यह प्रक्रिया वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर निर्धारित जनसंख्या मानकों के अनुरूप हो रही है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में कर्मचारियों को जोखिम :

इधर बाढ़ प्रभावित इलाकों में परिसीमन के काम में जुटे कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि टार्गेट को पूरा करने में हम सभी कर्मी जुटे है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फील्ड सर्वे करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई जगहों पर सड़क और संपर्क मार्ग जलमग्न हैं।कर्मचारियों का कहना है कि आपदा की स्थिति में काम करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा साधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। कर्मचारियों के अनुसार, कई इलाकों में बाढ़ के गंदे पानी, घनी झाड़ियों और सुनसान स्थानों के बीच सीमांकन बिंदु दर्ज करने पड़ रहे हैं। ऐसे में सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद वे जोखिम उठाकर काम पूरा करने में जुटे हैं।

परिसीमन के बाद बदल सकता है कई पंचायतों और वार्डों का स्वरूप :

परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिले की कई पंचायतों और वार्डों का स्वरूप बदल सकता है। जनसंख्या के नए अनुपात के आधार पर कहीं वार्डों की संख्या बढ़ सकती है, तो कहीं छोटे वार्डों के पुनर्गठन या विलय के कारण संख्या घट भी सकती है। हालांकि, निर्वाचन क्षेत्रों और पदों की वास्तविक स्थिति प्रारूप प्रकाशन, दावा-आपत्ति आमंत्रित करने तथा उनके निस्तारण के बाद ही स्पष्ट होगी। इसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। परिसीमन पूरा होने के बाद पंचायत चुनाव के लिए नए सिरे से आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए निर्धारित आरक्षण मानकों के अनुसार पदवार सीटों का आवंटन किया जाएगा। साथ ही, आरक्षण के चक्रीय क्रम यानी रोटेशन का भी निर्धारण होगा।

चुनाव से पहले कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं बाकी :

प्रशासनिक जानकारों के अनुसार, त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनाव से पहले परिसीमन, सीमाओं के पुनर्निर्धारण, प्रारूप प्रकाशन और दावा-आपत्ति के निस्तारण जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसके बाद आरक्षण रोस्टर तैयार करने, बूथवार मतदाता सूची के विखंडन, मतदान केंद्रों की भौतिक जांच और मतदान केंद्रों के गठन जैसी प्रक्रियाएं भी आवश्यक होंगी। जानकारों का मानना है कि परिसीमन और सीमाओं के पुनर्निर्धारण की पूरी कानूनी प्रक्रिया में छह महीने से अधिक का समय लग सकता है। इसके बाद चुनाव संबंधी अन्य तैयारियों में भी कई महीने लगने की संभावना है। हालांकि, चुनाव की वास्तविक समय-सीमा राज्य निर्वाचन आयोग के निर्णय और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

500 के करीब पहुंच सकती है पंचायतों की संख्या :

जिले में वर्तमान में 346 ग्राम पंचायतें हैं। परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या बढ़कर करीब 500 तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। जिला पंचायती राज पदाधिकारी के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के तहत वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जनसंख्या के अनुरूप वार्ड, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत और जिला परिषद क्षेत्रों का गठन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि निर्धारित मानकों के अनुसार करीब 500 की आबादी पर वार्ड, 5000 की आबादी पर पंचायत समिति क्षेत्र, 7000 की आबादी पर ग्राम पंचायत तथा 50 हजार की आबादी पर जिला परिषद क्षेत्र के गठन का प्रावधान है। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जिले के पंचायतों और निर्वाचन क्षेत्रों की वास्तविक संख्या और स्वरूप स्पष्ट हो सकेगा।

बयान :

रविवार शाम पांच बजे तक जिले में परिसीमन का 94.18 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। 10 प्रखंडों में शत-प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलजमाव और आवागमन की समस्या के कारण फील्ड सर्वे व सीमांकन का कुछ काम बाधित हुआ है। स्थिति सामान्य होने पर शेष कार्य तेजी से पूरा कर लिया जाएगा। परिसीमन की प्रक्रिया वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार की जा रही है।

विष्णुदेव मंडल, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, समस्तीपुर

Avinash Roy

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