मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच हासिल की सफलता, दलसिंहसराय SDPO की पत्नी डॉ. दिव्यानी बनीं असिस्टेंट प्रोफेसर

समस्तीपुर/दलसिंहसराय : शिवहर के पुरनहिया डिग्री कॉलेज में डॉ. दिव्यानी प्रियदर्शिनी का असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन हुआ है। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU), मुजफ्फरपुर के अंतर्गत कॉलेज में चयनित होकर उन्होंने न केवल अपनी शैक्षणिक उपलब्धि का परचम लहराया, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियों और मातृत्व के साथ करियर को आगे बढ़ाने की प्रेरणादायक मिसाल भी पेश की है। डॉ. दिव्यानी ने कक्षा 6 से 12वीं तक की पढ़ाई राजस्थान स्थित बनस्थली विद्यापीठ से की। इसके बाद पटना वीमेंस कॉलेज से स्नातक और पटना विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।
उन्होंने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल की। उनके शोध का विषय किशोर-किशोरियों से जुड़े सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं पर केंद्रित रहा। उनकी सफलता की राह आसान नहीं रही। पीएचडी के दौरान उनका विवाह दलसिंहसराय के एसडीपीओ विवेक कुमार शर्मा से हुआ। इसी दौरान वे एक संतान की मां भी बनीं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने पढ़ाई और शोध कार्य को जारी रखा।


पीएचडी के अंतिम वाइवा के समय वे अपने दूसरे बच्चे के लिए गर्भवती थीं। इसके बावजूद उन्होंने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। खास बात यह रही कि महज तीन माह के बच्चे की मां होने के बावजूद डॉ. दिव्यानी उसे साथ लेकर असिस्टेंट प्रोफेसर के साक्षात्कार में शामिल हुईं। आखिरकार उनकी मेहनत, धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति रंग लाई और उनका चयन असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हो गया।
डॉ. दिव्यानी अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता हेमंत कुमार शर्मा एवं प्रतिभा शर्मा, पति विवेक कुमार शर्मा, ससुर सुरेश शर्मा, सास इंदु शर्मा, भाइयों गौरव, सौरव एवं विकास, पीएचडी सुपरवाइजर स्निग्धा मैम, प्रिय मित्र अनुराधा सहित पूरे परिवार को देती हैं। उन्होंने कहा कि परिवार के निरंतर सहयोग, विश्वास और प्रोत्साहन ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर डटे रहने की ताकत दी।

डॉ. दिव्यानी की उपलब्धि सिर्फ नौकरी हासिल करने तक सीमित नहीं है। यह वर्षों की मेहनत, त्याग, धैर्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखने की कहानी है। उनकी सफलता उन महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायक है, जो परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाकर अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं। उनकी कहानी बताती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अपनों का सहयोग और निरंतर प्रयास हो तो विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता हासिल की जा सकती है।




