Samastipur

समस्तीपुर में अग्नि सुरक्षा पर ऐसी लापरवाही; सैकड़ों में सिर्फ 6 होटलों के पास फायर NOC

समस्तीपुर : मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल और दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्ट हाउस में हुए भीषण अग्निकांड के बाद समस्तीपुर जिले में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अग्निशमन विभाग के आंकड़ों के अनुसार समस्तीपुर शहर के 28 रजिस्टर्ड होटलों में से मात्र 6 होटलों के पास ही वैध फायर एनओसी है, जबकि 22 होटल या तो बिना एनओसी संचालित हो रहे हैं अथवा उनका नवीनीकरण नहीं कराया गया है। जबकी एक आंकड़ों के अनुसार जिले भर में सैकड़ों होटल संचालित है, जिसका आंकड़ा अग्निशमन विभाग के पास नहीं है।

दूसरी ओर जिले के 153 रजिस्टर्ड अस्पतालों में से 145 के पास फायर एनओसी उपलब्ध है। हाल की घटनाओं के बाद अग्निशमन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है और समस्तीपुर में भी सुरक्षा मानकों के अनुपालन को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। इसी कड़ी में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में एडीएम ब्रजेश कुमार ने बताया कि जिन अस्पतालों और होटलों का फायर ऑडिट हो चुका है तथा उनमें कमियां पाई गई हैं, उनके विरुद्ध 48 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू की जाएगी। ऐसे संस्थानों को नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में कमियां दूर करने का निर्देश दिया गया है।

जिन मामलों में अनुपालन की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, वहां विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत सीलिंग की कार्रवाई भी की जा सकती है। उन्होंने बताया कि जिन अस्पतालों और होटलों का अब तक फायर ऑडिट नहीं हुआ है, उन्हें सात दिनों के भीतर अग्नि ऑडिट कराने का निर्देश दिया गया है। ऑडिट के दौरान यदि कोई कमी पाई जाती है तो उसकी रिपोर्ट जारी कर 15 दिनों के भीतर अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।

अस्पतालों और होटलों, चाहे वे ऑडिटेड हों या अनऑडिटेड, सभी को 15 दिनों के भीतर सक्षम विद्युत अभियंता अथवा विद्युत प्राधिकरण से विद्युत भार विश्लेषण एवं विद्युत सुरक्षा प्रमाण-पत्र प्राप्त करना होगा। प्रमाण-पत्र में विद्युत भार, कनेक्टेड लोड, लोड वितरण, वायरिंग की स्थिति, अर्थिंग, डीजी और यूपीएस पैनल, आईसीयू, ओटी, ऑक्सीजन क्षेत्र, लिफ्ट तथा एसी लोड की जांच और ओवरलोडिंग नहीं होने का सत्यापन शामिल रहेगा। एडीएम ने कहा कि जहां कमियां तत्काल जीवन-जोखिम उत्पन्न करती हैं, वहां किसी भी सीलिंग कार्रवाई से पहले मरीजों की सुरक्षित निकासी और स्थानांतरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।

इस संबंध में जिला अग्निशमन पदाधिकारी हर्षवर्धन ने बताया कि चार मंजिल या उससे अधिक ऊंचाई वाले भवनों, होटल, लॉज और बैंक्वेट हॉल के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है। इसके बावजूद कई होटल सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन नहीं कर रहे हैं। हाल के निरीक्षणों में पर्याप्त अग्निशमन यंत्रों का अभाव, इमरजेंसी एग्जिट की कमी, फायर अलार्म सिस्टम का निष्क्रिय होना तथा कर्मचारियों को प्रशिक्षण नहीं दिया जाना जैसी कमियां सामने आई हैं। इन कमियों को दूर नहीं करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जाएगी।

अग्निशमन यंत्रों की नियमित जांच नहीं :

जिले के कई होटलों में अग्निशमन यंत्र तो लगाए गए हैं, लेकिन उनकी समय पर रिफिलिंग और सर्विसिंग नहीं हो रही है। कुछ संस्थानों में स्प्रिंकलर और हाइड्रेंट सिस्टम स्थापित हैं, लेकिन उनकी कार्यशीलता पर भी सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कर्मचारियों को उनके उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। समस्तीपुर शहर में कई ऐसे होटल हैं जिनकी ऊंचाई चार मंजिल या उससे अधिक है। ऐसे भवनों में आग लगने की स्थिति में ऊपरी मंजिलों से लोगों को सुरक्षित निकालना सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। अग्निशमन विभाग के अनुसार पर्याप्त खुली जगह, फायर टेंडर की पहुंच और वैकल्पिक निकासी व्यवस्था अनिवार्य है, लेकिन कई स्थानों पर संकरी गलियां और अव्यवस्थित पार्किंग राहत कार्य में बाधा बन सकती हैं।

किचन क्षेत्र सबसे संवेदनशील :

होटलों और बैंक्वेट हॉलों के किचन क्षेत्र को आग लगने का सबसे संवेदनशील स्थान माना जाता है। एलपीजी सिलेंडर, गैस पाइपलाइन, गर्म तेल और विद्युत उपकरणों के कारण यहां जोखिम अधिक रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार बड़े होटलों में किचन फायर सप्रेशन सिस्टम होना चाहिए, लेकिन अधिकांश छोटे और मध्यम होटलों में ऐसी व्यवस्था नहीं है।

अग्निकांड की अधिकांश घटनाओं में शॉर्ट सर्किट प्रमुख कारण के रूप में सामने आता है। कई पुराने होटलों में वर्षों पुरानी वायरिंग आज भी उपयोग में है। विद्युत निरीक्षण और लोड परीक्षण की प्रक्रिया भी नियमित रूप से नहीं हो पाती, जिससे खतरा बढ़ जाता है। शादी-विवाह और अन्य आयोजनों के दौरान होटल परिसरों में संचालित बैंक्वेट हॉलों में क्षमता से अधिक भीड़ जुटने की शिकायतें भी मिलती रही हैं। ऐसी स्थिति में किसी आपदा के समय भगदड़ और जनहानि की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं स्वीकृत नक्शे से अधिक मंजिलें तो नहीं बनाई गई हैं तथा पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं, ताकि आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड के वाहन आसानी से पहुंच सके।

Avinash Roy

Recent Posts

1 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय घपले में पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक निलंबित, वर्तमान में समस्तीपुर जिले में हैं पदस्थापित

समस्तीपुर : बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा राज्य में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के…

4 घंटे ago

महुआ विधायक और मंत्री संजय सिंह पर दिल्ली के होटल में युवती से बदतमीजी का आरोप! तेज प्रताप यादव ने की जांच की मांग

बिहार सरकार के मंत्री और महुआ विधानसभा सीट से विधायक संजय सिंह पर एक युवती…

10 घंटे ago

रोसड़ा की नई SDO बनीं पूजा कुमारी, सादिक अख्तर बने समस्तीपुर सदर के नये अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी

समस्तीपुर : बिहार सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए बिहार प्रशासनिक सेवा…

17 घंटे ago

BREAKING : समस्तीपुर सदर SDPO-1 बदले, सतीश सुमन को मिली जिम्मेदारी, संजय कुमार पांडेय का हुआ तबादला

समस्तीपुर : बिहार सरकार ने बिहार पुलिस सेवा के डीएसपी स्तर के 27 पुलिस अधिकारियों…

18 घंटे ago

समस्तीपुर जिले के इन 9 CHC में खुलेंगे ब्लड सेंटर, सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक और रेडक्रास पर निर्भरता होगी कम

समस्तीपुर : ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब रक्त की…

19 घंटे ago

जस्सी ह’त्याकांड के फरार आरोपियों के घर कुर्की-जब्ती, न्यायालय के आदेश पर मुफस्सिल थाने की पुलिस ने की कार्रवाई

समस्तीपुर : मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बहादुरपुर मोहल्ले में शनिवार को पुलिस ने जस्सी हत्याकांड…

19 घंटे ago