सिपाही भर्ती परीक्षा सेटिंग कांड में बड़े नेटवर्क की तलाश में हसनपुर में फिर से छापेमारी; धनेश्वर, रौशन, महाकाल और सोनू की गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी जारी

समस्तीपुर : मद्यनिषेध सिपाही, कक्षपाल एवं चलंत दस्ता सिपाही भर्ती परीक्षा में धांधली की साजिश का खुलासा होने के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुट गई है। मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों से पूछताछ तथा उनके निशानदेही पर अन्य संदिग्धों की तलाश में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। रविवार देर रात तक पुलिस हसनपुर थाना क्षेत्र में संभावित ठिकानों पर दबिश देती रही। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कुल कितने लोग शामिल हैं और इसका असली मास्टरमाइंड कौन है। अब तक की जांच में यह मामला केवल चार लोगों तक सीमित नहीं दिख रहा है। पुलिस को आशंका है कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जो विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कदाचार कराने का काम करता है।
सदर एसडीपीओ-1 सह एएसपी संजय कुमार पांडेय ने बताया कि गिरफ्तार चारों आरोपियों अमित कुमार, दीपक कुमार, पंकज कुमार सहनी और नितिश कुमार से गहन पूछताछ की गयी है। जिसमें सभी अभियुक्तों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। अभियुक्तों के द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की संख्या और उनकी तकनीकी क्षमता को देखते हुए किसी बड़े नेटवर्क से इनके जुड़े होने की आशंका है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि अत्याधुनिक उपकरण कहां से लाए गए, इन्हें किसने उपलब्ध कराया और परीक्षा में धांधली की पूरी योजना किस स्तर पर तैयार की गई थी।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हसनपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले धनेश्वर महतो, रौशन कुमार, महाकाल तथा सोनू उर्फ चंदन की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। रविवार की देर रात तक पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर कार्रवाई में जुटी रही। हालांकि छापेमारी के दौरान क्या बरामद हुआ है, इस संबंध में पुलिस ने फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।
वीडियोग्राफी की आड़ में प्रश्नपत्र बाहर भेजने की थी योजना :
जांच में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार आरोपी पंकज कुमार सहनी परीक्षा केंद्रों पर वीडियोग्राफी का कार्य करता था। आरोप है कि वह परीक्षा केंद्र पर परीक्षार्थियों की वीडियोग्राफी के दौरान प्रश्नपत्र की तस्वीर लेकर उसे बाहर मौजूद गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाता था। इसके बाद धनेश्वर महतो, महाकाल और सोनू उर्फ चंदन जैसे सदस्य बाहर बैठकर प्रश्नों का उत्तर तैयार करते और वॉकी-टॉकी तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से केंद्र के अंदर मौजूद परीक्षार्थियों तक जवाब पहुंचाते थे।

रौशन कुमार ब्लूटूथ डिवाइस वाला चप्पल तैयार करता था व नितीश कुमार का काम अभ्यर्थियों को लाना था। पूरे गैंग को अमित व दीपक चला रहा था।पुलिस का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर कदाचार हो सकता था। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

4 से 5 लाख में होती थी डील :
आरोपियों ने कई चौंकाने वाले राज उगले हैं। गिरोह के सदस्यों ने स्वीकार किया कि हर परीक्षार्थी से परीक्षा पास कराने के एवज में 4 से 5 लाख रुपये की डील की गई थी। आरोपियों की योजना थी कि परीक्षा शुरू होते ही केंद्रों के बाहर बैठे सॉल्वर गैंग के सदस्य 400 मीटर की रेंज वाले ब्लूटूथ और वॉकी-टॉकी के जरिए सीधे अंदर मौजूद अभ्यर्थियों को सही उत्तर नोट करवा देंगे। साॅल्वर गैंग के सदस्यों द्वारा परीक्षार्थियों से उनके मूल प्रमाण पत्र, ब्लैंक चेक बुक और स्टांप लिये जाते। समस्तीपुर पुलिस ने छापेमारी के दौरान दर्जनों परीक्षार्थियों के मूल प्रमाण पत्र, ब्लैंक चेक बुक और स्टांप बरामद किये है। इसमें कई युवती भी शामिल है। बरामद प्रमाण-पत्र के आधार पर सभी परीक्षार्थियों से भी पुलिस पूछताछ कर रही है।
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