समस्तीपुर पुलिस व बदमाश के बीच हुए एनकाउंटर में घायल प्रिंस को इलाज के बाद भेजा गया जेल

समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले के उजियारपुर थाना क्षेत्र के देसुआ गांव में पुलिस और लूटकांड के आरोपी के बीच हुई मुठभेड़ में घायल प्रिंस कुमार को इलाज के बाद जेल भेज दिया गया है। इस संबंध में उजियारपुर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर अजीत कुमार ने पुष्टि करते हुए बताया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। गौरतलब है कि मंगलवार की रात करीब 3:30 बजे देसुआ चौर स्थित बाड़ा गाछी में पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान दलसिंहसराय थाना क्षेत्र के भगवानपुर चकसेखु निवासी पिंटू लाल के पुत्र प्रिंस कुमार के दाहिने पैर में एड़ी के ऊपर गोली लगी थी।
घटना को लेकर उजियारपुर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर अजीत कुमार के स्वलिखित बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। दर्ज एफआईआर के अनुसार, उजियारपुर थाना क्षेत्र में 27 अप्रैल को हुई लूट की घटना के अनुसंधान के दौरान पुलिस ने प्रिंस कुमार के अलावा विद्यापतिनगर थाना क्षेत्र के आलमपुर सिमरी निवासी चंदन कुमार सिंह के पुत्र भूपेंद्र उर्फ देव तथा दलसिंहसराय थाना क्षेत्र के गौसपुर निवासी बंशी दास के पुत्र लक्ष्मण दास को गिरफ्तार किया था।

पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने देसुआ गांव स्थित बाड़ा गाछी में हथियार छिपाकर रखने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस टीम तीनों आरोपियों को साथ लेकर हथियार बरामदगी के लिए मौके पर पहुंची। एफआईआर में दावा किया गया है कि जब प्रिंस कुमार को हथियार निकालने के लिए कहा गया, तभी उसने छिपाए गए पिस्तौल से पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार आत्मरक्षा में उजियारपुर एसएचओ इंस्पेक्टर अजीत कुमार, डीआईयू टीम के दारोगा अमित कुमार तथा एसटीएफ के जवान द्वारा जवाबी फायरिंग की गई, जिसमें प्रिंस कुमार घायल हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।

घटनास्थल की तलाशी में पुलिस ने दो देशी कट्टा, एक पिस्टल, कई जिंदा कारतूस तथा अलग-अलग पॉलीथिन और पर्स में रखे कुल 77 हजार 100 रुपये बरामद करने का दावा किया। गोली लगने के बाद घायल प्रिंस कुमार को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पुलिस अभिरक्षा में उसका इलाज चला। इस दौरान पुलिस ने इन तीनों की निशानदेही पर अनीश कुमार व विकास कुमार साह को भी गिरफ्तार किया। इस सभी गिरफ्तार आरोपियों को घटना के अगले दिन ही न्यायालय में प्रस्तुत कर जेल भेज दिया गया था।




