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राष्ट्रीय लोक अदालत में 2 हजार 709 मामलों का निष्पादन, साढ़े 4 करोड़ से अधिक की वसूली

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समस्तीपुर : जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार समस्तीपुर समीर कुमार ने की। प्राधिकरण द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक ऋण, बीएसएनएल तथा ई-चालान से जुड़े कुल 1 हजार 259 विवादित मामलों का निष्पादन किया गया। इन मामलों में समझौता राशि के रूप में कुल 4 करोड़ 47 लाख 54 हजार 749 रुपये की वसूली हुई।

वहीं न्यायालयों में लंबित सुलहनीय वादों, जैसे क्लेम वाद, विद्युत वाद, 138 एनआई एक्ट, जीओ एवं अन्य आपराधिक सुलहनीय मामलों से संबंधित कुल 1 हजार 450 मामलों का भी निष्पादन किया गया। इन मामलों में कुल 25 लाख 91 हजार रुपये की समझौता राशि प्रदान की गई। इस प्रकार राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से कुल 2 हजार 709 मामलों का सफल निष्पादन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव मनोज कुमार ने बताया कि लोक अदालत के जरिए लोगों को त्वरित, सुलभ एवं कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे लंबित मामलों के निष्पादन में भी तेजी आई है। लोक अदालत के दौरान डीएम रोशन कुशवाहा, एसपी अरविंद प्रताप सिंह समेत अन्य उपस्थित रहे।

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लोगों की संतोषजनक प्रतिक्रिया :

लोक अदालत में बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने वर्षों पुराने मुकदमों से राहत मिलने पर संतोष जताया। कई ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें पक्षकार लंबे समय से तारीख पर तारीख मिलने से परेशान थे। समझौते के जरिए जब मामलों का निस्तारण हुआ तो लोगों ने इसे राहत भरा फैसला बताया।

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फरियादियों की कहानियाँ :

फरियादी अशोक महतो और राम उद्गार महतो ने बताया कि उन्होंने करीब पांच वर्ष पहले बैंक से ऋण लिया था, लेकिन आर्थिक परेशानियों के कारण समय पर किस्त जमा नहीं कर सके। समय बीतने के साथ ब्याज बढ़ता गया और मामला न्यायालय तक पहुंच गया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनवाई के दौरान अधिकारियों और न्यायिक टीम के सहयोग से मामला आसानी से सुलझ गया और मुकदमा समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि यदि यह समझौता पहले हो जाता तो वर्षों तक अदालत के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। लोक अदालत के माध्यम से उन्हें न केवल आर्थिक राहत मिली बल्कि मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिली।

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न्यायिक अधिकारियों की सक्रियता :

राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका देखने को मिली। अदालत परिसर में सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटी रही। न्यायालय प्रशासन की ओर से पक्षकारों को समझौते के माध्यम से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया गया। वहीं, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश समीर कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को त्वरित, सुलभ और सस्ता न्याय उपलब्ध कराना है। आपसी सौहार्द और सहमति से विवाद समाप्त होने पर समाज में भाईचारा भी मजबूत होता है और लोगों का समय व धन दोनों बचते हैं।

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