Samastipur

समस्तीपुर सदर अस्पताल का डायलिसिस सेंटर किडनी मरीजों के लिए बना जीवनदायिनी, राशन कार्डधारकों को मिलती है मुफ्त सेवा

समस्तीपुर : जिले के किडनी मरीजों के लिए सदर अस्पताल स्थित डायलिसिस सेंटर किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है। यहां 10 बेड की अत्याधुनिक सुविधा के साथ प्रतिदिन चार शिफ्टों में मरीजों का डायलिसिस किया जाता है। इस सेंटर के शुरू होने से खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को काफी राहत मिल रही है, जिन्हें पहले महंगे इलाज के कारण निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था। अस्पताल में स्थापित आधुनिक डायलिसिस मशीनों के माध्यम से प्रशिक्षित टेक्नीशियनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों का सुरक्षित उपचार किया जा रहा है। यही कारण है कि जिले के विभिन्न प्रखंडों के अलावा पड़ोसी क्षेत्रों से भी मरीज यहां इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। हर रोज यहां करीब 30 से 40 मरीजों का डायलिसिस किया जाता है। एक मरीज के डायलिसिस प्रक्रिया में लगभग चार घंटे का समय लगता है।

मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन द्वारा चार अलग-अलग शिफ्टों में डायलिसिस की व्यवस्था की गई है ताकि अधिक से अधिक मरीजों को समय पर सुविधा मिल सके। मिले एक आंकड़े के अनुसार, सेंटर पर करीब 100 मरीज सूचीबद्ध हैं। पीपीपी मोड में संचालित डायलिसिस सेंटर में उपचार पाने के बाद सभी राहत भी महसूस कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सेंटर संचालन होने से पहले की डायलिसिस के लिए मरीजों को पटना जाना होता था। लेकिन, सदर अस्पताल में सेंटर के संचालन होने के बाद से आसानी से जिले में ही मुफ्त में डायलिसिस की सुविधा मिल रही है।

इस सेंटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि राशन कार्डधारी एपीएल एवं बीपीएल परिवारों के मरीजों को यहां निःशुल्क डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है। इससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है। वहीं सामान्य मरीजों के लिए भी डायलिसिस का शुल्क निजी सेंटरों की तुलना में काफी कम रखा गया है। जहां निजी डायलिसिस सेंटरों में एक बार डायलिसिस कराने पर 2500 से 3000 रुपये तक खर्च हो जाते हैं, वहीं सदर अस्पताल में मात्र 1797 रुपये में यह सुविधा उपलब्ध है। कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलने से मरीजों और उनके परिजनों में संतोष देखा जा रहा है।

सातनपुर के रहने वाले एक मरीज के परिजन अशोक कुमार का कहना है कि पहले डायलिसिस के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी। अब जिले में ही यह सुविधा मिलने से काफी सहूलियत हो गई है। सदर अस्पताल के डीएस डॉ. गिरीश कुमार ने बताया की सरकार की मंशा है कि कोई भी गरीब मरीज पैसे के अभाव में इलाज से वंचित न रहे। इसी उद्देश्य से इस तरह की सुविधाओं को और मजबूत किया जा रहा है। आने वाले समय में जरूरत के अनुसार बेड की संख्या बढ़ाने और सुविधाओं का और विस्तार करने की भी योजना पर विचार किया जा रहा है। सदर अस्पताल का यह डायलिसिस सेंटर आज जिले के सैकड़ों किडनी मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ऐसे कार्य करता है डायलिसिस :

किडनी खराब होने पर मरीजों के लिए डायलिसिस वह प्रक्रिया है, जिसके तहत किडनी के बदले कार्य किया जाता है। शरीर से उपयोगी पदार्थ और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में जब किडनी सक्षम नहीं रहता, तब डायलिसिस की प्रक्रिया अपनायी जाती है। सदर अस्पताल स्थित डायलिसिस केंद्र में होमोडायलिसिस की सुविधा भी है। इस प्रक्रिया के तहत शरीर के बाहर लगे मशीन से सुई की मदद से रक्त निकाला जाता है। रक्त को साफ कर पूरे शरीर के अंदर प्रवाहित किया जाता है। बता दें कि, डायलसिस एक जीवन रक्षक तकनीक है। हालांकि, यह एक अस्थायी इलाज है। उल्लेखनीय है कि जब मानव शरीर की दोनों किडनी काम करना बंद कर देती हैं, तब उसका कार्य मशीन की सहायता से किया जाता है जिसे डायालसिस कहते हैं। इस प्रक्रिया के तहत शरीर में जमा होने वाले टॉक्सिन और अतिरिक्त पानी को बाहर निकाला जाता है।

बयान :

राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर डायलिसिस केंद्र का संचालन किया जा रहा है। इससे एक तरफ जहां किडनी रोगियों को सहूलियत हो रही है वहीं, दूसरी तरफ उनके काफी पैसे भी बच रहे हैं।

डॉ. गिरीश कुमार, डीएस, सदर अस्पताल, समस्तीपुर

Avinash Roy

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