समस्तीपुर : सदर अस्पताल स्थित 100 बेड का वातानुकूलित मातृ-शिशु अस्पताल (एमसीएच) का भवन कई महीनों से बनकर तैयार है। सिंतबर माह में मुख्यमंत्री ने पटना से ही रिमोट के जरिये इसका उद्घाटन भी कर दिया लेकिन अब तक इसको चालू नहीं किया जा सका है। मामला हैंडओवर को लेकर अटका पड़ा है। मिली जानकारी के अनुसार जिला स्वास्थ्य समिति इसकी गुणवत्ता से अब तक संतुष्ट नहीं है। इसके हैंडओवर से पहले सिविल सर्जन ने बिल्डिंग की गुणवत्ता व संसाधनों की जांच के लिये डीएस डॉ. गिरीश कुमार की अध्यक्षता में पांच सदस्यी टीम का गठन किया था।
टीम में डॉ. गिरीश कुमार के अलावे चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार, हाॅस्पीटल मैनेजर सन्नी दयाल राय, वरीय फार्मासिस्ट शैलेश कुमार व सहायक प्रशासी पदाधिकारी धरविंद पासवान को शामिल करते हुए 5 सदस्यीय टीम बनाई गई थी। सिविल सर्जन के आदेश पर गठित टीम एमसीएच भवन में सभी सामग्री, मशीनों व उपकरणों का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंप दी है। अब सिविल सर्जन रिपोर्ट के आधार पर भवन के हैंडओवर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
हैंडओवर से पूर्व सभी व्यवस्थाओं की जांच की गयी है, ताकि एमसीएच भवन के संचालन में किसी प्रकार की कमी न रहे और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से शुरू हो सकें। इन सभी प्रकियाओं को पूरा करते-करते दिसंबर बीत जाएगा। सिंतबर माह में ही उद्घाटन के बाद सुचारू रूप से एमसीएच के शुरू होने में तीन महीना से अधिक लग गया। अभी भी इसके शुरू होने की कोई तिथि निर्धारित नहीं की जा सकी है।
बता दें कि एमसीएच भवन के शुरू होते ही सदर अस्पताल का लेबर रूम, महिला वार्ड और एसएनसीयू को यहां शिफ्ट किया जाएगा। नई बिल्डिंग पूरी तरह वातानुकूलित है, जिससे मरीजों को बेहतर माहौल और इलाज की बेहतर सुविधा मिलेगी। इसे शुरू कराने को को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार एमसीएच भवन का निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि किसी तरह की कमी न रह जाए। संतुष्ट होने पर ही स्वस्थ्य विभाग एनओसी देकर भवन को टेक ओवर करेगा। इससे पहले डीएम रोशन कुशवाहा ने भी पिछले वर्ष नवंबर महीने में एमसीएच बिल्डिंग का निरीक्षण किया था जिसमें कई खामियां निकली थी, जिसे उन्होंने दुरूस्त करने का निर्देश दिया था। उसके बाद भवन बहुत कुछ बदलाव किये गये थे।
करीब तीन महीने पहले भवन पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका है और सितंबर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसका उद्घाटन भी कर दिया है। स्थानीय ललन यादव ने बताया कि एमसीएच भवन जल्द से जल्द शुरू करने की आवश्यकता है। इसके शुरू हो जाने से हजारों लोगों को फायदा होगा। इसके शुरू होने के बाद यहां हर रोज सैकड़ों महिला व शिशु रोगियों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। यह न सिर्फ इलाज की गुणवत्ता बढ़ाएगा, बल्कि सरकारी अस्पतालों की छवि को भी सुधारेगा। आम लोगों को अब मामूली समस्याओं के लिए निजी अस्पताल की ओर भागना नहीं पड़ेगा। वातानुकूलित वातावरण, बेहतर संसाधन और प्रशिक्षित स्टाफ के साथ यह अस्पताल जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने वाला साबित होगा।
एमसीएच बिल्डिंग में 100 बेड का मदर-चाइल्ड केयर वार्ड बनाया गया है। यहां मातृ-शिशु से संबंधित सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसमें लेबर रूम व महिला वार्ड के लिये बड़ा हॉल बनाया गया है। यहां प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा की बेहतर देखभाल की जाएगी। सौ बेड का यह अस्पताल सभी सुविधाओं से लैस रहेगा। इसके शुरू होने के साथ ही भवन में स्पेशल चाइल्ड केयर यूनिट के साथ, पीकू वार्ड को भी यहीं शिफ्ट किया जाएगा। आईसीयू की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। इसी भवन में पैथोलॉजी जांच को भी शिफ्ट करने की तैयारी है। भवन में नए उपस्कर लगाए गए हैं। जिससे मरीजों को बेहतर से बेहतर सुविधा मिलेगी। सेंटर के शुरू होने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को राहत मिलेगी। निजी क्लीनिक के आर्थिक दोहन से बच सकेंगे। इसमें मां और नवजात के इलाज से जुड़ी सारी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
सिविल सर्जन के निर्देश पर एमसीएच भवन में संसाधनों की जांच के लिये पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया था। जांच के बाद सिविल सर्जन कार्यालय में रिपोर्ट सौंप दी गयी है। आगे सिविल सर्जन के निर्देशानुसार हैंडओवर की प्रक्रिया होगी।
डॉ. गिरीश कुमार, डीएस, सदर अस्पताल समस्तीपुर
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