Samastipur

इमरजेंसी ड्यूटी से नदारद चार डॉक्टरों ने एक महीने बाद भी स्पष्टीकरण का नहीं दिया जवाब, नियम ताख पर रख डॉ. संतोष फिर से अन्य डॉक्टरों की जगह कर रहे ड्यूटी

समस्तीपुर : सदर अस्पताल में डॉक्टरों की ओर से ड्यूटी में लापरवाही की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। तय रोस्टर के बावजूद अधिकांश डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं पहुंचते हैं व बिना जानकारी दिए गायब रहते हैं। इसमें ज्यादातर नियमित डॉक्टर हैं। इस मनमानी के कारण मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। एक ही डाॅक्टर द्वारा रोस्टर उल्लंघन कर लगातार 30 घंटो तक ड्यूटी करने का मामला सामनें आने के बावजूद संबंधित डॉक्टर पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा सिर्फ स्पष्टीकरण कर खानापूर्ति कर दी गई। स्पष्टीकरण का जबाव आया या नहीं अब तक सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. गिरीश को जानकारी नहीं थी।

संवाददाता द्वारा पड़ताल करने पर डीएस ने रिकॉर्ड खंगाला तो अब तक पांचों डॉक्टर में से सिर्फ एक डॉक्टर संतोष झा ने ही अपने स्पष्टीकरण का जबाव दिया है, जिसे सिविल सर्जन कार्यालय को भेजा गया है। डीएस ने बताया कि डॉ. मनीष कुमार, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. उत्सव कुमार और डॉ. एनके चौधरी ने अब तक अपने स्पष्टीकरण का जबाव नहीं दिया है। जबकि पांचों डॉक्टर को 24 घंटे के भीतर अपने-अपने स्पष्टीकरण का जबाव दिया जाना था। एक महीने से अधिक बीत जाने की बावजूद अब तक संबंधित डॉक्टरों ने स्पष्टीकरण का जबाव देना मुनासिब नहीं समझा है। पूछे जाने पर डीएस ने बताया की मंगलवार को फिर से सभी डॉक्टरों को नोटिस भेजा जाएगा।

इधर मंगलवार को रोस्टर की धज्जियां उड़ाते हुए डॉ. संतोष झा फिर से इमरजेंसी वार्ड में किसी अन्य डॉक्टर की जगह ड्यूटी करते मिले। जबकि संतोष झा ने अपने स्पष्टीकरण के जबाब में लिखकर दिया था की आगे से वह किसी अन्य डॉक्टर की जगह ड्यूटी नहीं करेंगे। इसकी सारी जानकारी अस्पताल प्रबंधन व डीएस को थी, बावजूद इसके सभी मौन धारण कर रोस्टर की धज्जियां उड़ा अन्य डॉक्टरों की जगह ड्यूटी कराते रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ऐसे डॉक्टरों की हाजिरी भी बन जा रही है। उक्त सभी डॉक्टर कार्यालय से मैनेज कर सदर अस्पताल की ड्यूटी छोड़कर अपने-अपने निजी अस्पतालों को संचालित करने में लगे रहते हैं व अपनी जगह अन्य डॉक्टर से ड्यूटी करा शिफ्ट के हिसाब से तय रकम दे देते है।

हालांकि इस मामले पर डीएस डॉ. गिरीश कुमार भी सही तरीके से जबाब नहीं दे सके। उपस्थिति पंजी मांगने पर बोले की उक्त डॉक्टरों का एक-एक दिन का वेतन काट दिया गया है और उपस्थिति पंजी में सभी को अनुपस्थित कर दिया गया है। हालांकि इसमें कोई दोमत नहीं है की डीएस को पहले से इस मामले की जानकारी नहीं हो। मामला उजागर होने के बावजूद अब तक सदर अस्पताल प्रबंधन ने रोस्टर सुधार और इसे सख्ती से पालन कराने को लेकर कारवाई नहीं कर रही है। स्पष्टीकरण के नाम पर खानापूर्ति कर फिर से संतोष झा से ही अन्य डॉक्टरों की जगह ड्यूटी ली जा रही है।

संतोष झा पर पहले से ही आरोप लगते रहे हैं की उन्होंने लगातार 30 घंटे तक इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी की, जो इमरजेंसी सेवा प्रोटोकॉल और रोस्टर मानकों का गंभीर उल्लंघन है। इस मामले में कार्रवाई के बदले अस्पताल प्रबंधन इसके लीपापोती में लगी हुई है। इधर सिविल सर्जन डॉ. एसके चौधरी ने डीएस डॉ. गिरीश कुमार को सख्त हिदायत दी थी की आगे से इमरजेंसी वार्ड में रोस्टर के हिसाब से ही ड्यूटी हो, लेकिन सिविल सर्जन की बातों को अनसुना कर फिर से डाॅ. संतोष झा से ही लगातार इमरजेंसी वार्ड में अन्य डॉक्टर की जगह ड्यूटी ली जा रही है।

चार डॉक्टरों को फिर से नोटिस : 

नवंबर माह में डीएस द्वारा पांचों डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। नोटिस में स्पष्ट लिखा गया था कि रोस्टर के अनुसार ड्यूटी पर उपस्थित न होना कर्तव्यहीनता और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। सभी पांचों डॉक्टरों से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसमें से चार डॉक्टरों ने अबतक अपने स्पष्टीकरण का जबाव नहीं दिया, जिस कारण उन चारों डॉक्टरों का एक दिन का वेतन काटने की बात डीएस ने बतायी है। इसमें डॉ. मनीष कुमार, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. उत्सव कुमार और डॉ. एनके चौधरी शामिल है। डॉक्टरों की अनुपस्थिति के बीच लगातार कई शिफ्ट संभालने वाले डॉ. संतोष कुमार झा को भी अलग से नोटिस जारी किया गया था। स्पष्टीकरण का जबाव देते हुए उन्होंने आगे से रोस्टर अनुसार ही ड्यूटी करने की बात कही थी। लेकिन मंगलवार को फिर से वह अन्य डॉक्टर की जगह ड्यूटी करते मिले।

इधर सिविल सर्जन डॉ. एसके चौधरी ने माना है की इमरजेंसी वार्ड में रोस्टर पालन नहीं करना बड़ी लापरवाही है। संतोष झा ने जवाब दिया है कि उनके अगले शिफ्ट के डाॅक्टर नहीं आये इस कारण उन्होंने ड्यूटी की। आगे से वह इस प्रकार ड्यूटी नहीं करेंगे। लेकिन लगातार 30 घंटे तक चार-चार डॉक्टरों के नहीं आने और उनकी ड्यूटी संतोष झा से ही करायी जाने का मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि प्रतिदिन औसतन 100 के करीब गंभीर मरीज इलाज के सदर अस्पताल में पहुंचते हैं। उनका किस तरह से इलाज होता होगा यह सोचने वाली बात है। जबकि, किसी भी आपात स्थिति को छोड़कर अस्पताल के किसी भी डॉक्टर या कर्मी से 8 घंटा से अधिक ड्यूटी नहीं लिया जाना है।

बयान :

सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में रोस्टर का उल्लंघन गंभीर मामला है। नंबर माह की उपस्थिति पंजिका मंगाकर जांच की जाएगी व दोषी के उपर कारवाई की जाएगी। सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कुछ दलालों के भी सक्रिय रहने की शिकायत प्राप्त हुई है। सिविल सर्जन से इस संबंध में जानकारी ली जा रही है।

रोशन कुशवाहा, डीएम, समस्तीपुर

Avinash Roy

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