समस्तीपुर में 500 से अधिक जांच घरों का कारोबार चरम पर, सिर्फ 74 जांच घर और 76 अल्ट्रासाउंड ही रजिस्टर्ड, बाकी फर्जी केंद्रों पर कार्रवाई शुन्य

समस्तीपुर : जिले में खुलेआम चल रहे अवैध जांच घरों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की सच्चाई चौंकाने वाली है। जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंडों तक बड़ी संख्या में बिना रजिस्ट्रेशन और बिना योग्य डॉक्टर-तकनीशियन के ये केंद्र संचालित हो रहे हैं। इनमें मैट्रिक व इंटर पास युवक तक भोले-भाले मरीजों की जांच कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में है। शहर के काशीपुर, मोहनपुर, आदर्शनगर समेत कई इलाकों में धड़ल्ले से ऐसे फर्जी जांच घर चल रहे हैं, जिनका नेटवर्क गांवों तक फैला हुआ है।
इन केंद्रों को कई निजी नर्सिंग होम व क्लीनिक संचालक डॉक्टरों का संरक्षण भी प्राप्त है, जहां जांच के लिए रिफर करने पर मोटी कमीशन की अदायगी होती है। कुछ महीने पूर्व सिविल सर्जन के निर्देश पर जिला मुख्यालय से लेकर कल्याणपुर, मोहिउद्दीननगर समेत अन्य प्रखंडों में कई फर्जी जांच घरों को सील किया गया था, परंतु आरोप है कि कार्यालय के कुछ कर्मियों से मिलीभगत कर कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, और ये केंद्र फिर से खुलेआम संचालन करने लगे। सूत्रों की मानें तो इन अवैध जांच घरों के संचालक हर महीने स्वास्थ्य विभाग के कुछ बाबुओं तक अवैध रकम पहुंचाते हैं, वहीं डॉक्टरों को जांच भेजने पर कमीशन मिलता है। गरीब और लाचार मरीज इस जाल में फंसकर गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाज कराने को मजबूर हैं।

जिले में लगभग 500 से अधिक पैथोलॉजी और जांच केंद्र संचालित हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ 74 ही जांच केंद्र रजिस्टर्ड हैं। ज्यादातर केंद्रों में न तो प्रशिक्षित लैब टेक्नीशियन हैं और न ही पॉल्यूशन बोर्ड व मेडिकल वेस्ट प्रबंधन का पंजीकरण। कई जगहों पर रेट चार्ट तक नहीं लगे हैं और मरीजों से मनमानी वसूली की जा रही है।

जिले में 74 जांच घर व 76 अल्ट्रासाउंड रजिस्टर्ड :
सिविल सर्जन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले भर में कुल 74 पैथोलॉजी- जांच घर और 76 अल्ट्रासाउंड केंद्र आधिकारिक रूप से रजिस्टर्ड हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ये सभी केंद्र निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद ही पंजीकृत किए गए हैं। हालांकि आंकड़ों पर गौर करें तो जिले भर में हजारों पैथोलॉजी- जांच घर, अल्ट्रासाउंड व नर्सिंग संचालित है।

सिविल सर्जन का कहना है कि नियमित निरीक्षण के माध्यम से इन जांच घरों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की कार्यप्रणाली की निगरानी की जा रही है, ताकि मरीजों को सही रिपोर्ट और गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध हो सके। विभाग ने बिना रजिस्टर्ड जांच घर या अल्ट्रासाउंड संचालित करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। उनके विरूद्ध लगातार कारवाई भी की जा रही है। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत एवं रजिस्टर्ड केंद्रों से ही जांच कराएं, जिससे गलत रिपोर्ट और धोखाधड़ी से बचा जा सके।

बिना एमबीबीएस डॉक्टर के चल रहे नर्सिंग होम :
जिले में कई नर्सिंग होम बिना एमबीबीएस डॉक्टर के संचालित हो रहे हैं, जहां पारा मेडिकल कर्मी मरीजों का इलाज और यहां तक कि ऑपरेशन तक कर रहे हैं। गलत इलाज की वजह से कई मरीज अपनी जान गंवा चुके हैं। सरकार की सख्त हिदायतों के बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, जिससे संचालकों में भय नहीं है।

सदर अस्पताल में बिचौलियों का बोलबाला :
सदर अस्पताल में मरीजों को निजी क्लीनिक भेजने वाले दलालों का प्रभाव लगातार बढ़ा है। प्रसव कराने पहुंचने वाली महिलाएं इनके मुख्य निशाने पर रहती हैं। कुछ आशा कार्यकर्ताओं और अस्पताल के कुछ कर्मियों पर भी इन बिचौलियों के साथ मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं। वहीं सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में तैनात कुछ कर्मी खुद दलालों के संपर्क में रहते हैं और मरीजों को बिना उचित इलाज के निजी क्लीनिकों में भेज देते हैं। कई बार तो मरीजों को डॉक्टर के पास जाने तक का मौका नहीं मिलता और एंबुलेंस में ही सीधे क्लीनिक भेज दिया जाता है। जिले में अवैध जांच घरों, अल्ट्रासाउंड केंद्रों व नर्सिंग होम की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करती है।
बयान :
जिले भर में कुल 74 अल्ट्रासाउंड केंद्र व 78 जांच केंद्र रजिस्टर्ड है। अवैध अल्ट्रासाउंड व जांच केंद्रों पर कार्रवाई के लिए एक टीम का गठन किया गया है। कुछ माह पूर्व अभियान चलाया गया था। जिसमें शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी छापेमारी कर अवैध तरीके से संचालित जांच घरों व अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील किया गया था। छापेमारी टीम का गठन कर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
डॉ. एसके चौधरी, सिविल सर्जन, समस्तीपुर


