क्या आपकी NEET एग्जाम में रैंक कम है? MBBS में एडमिशन नहीं मिल रहा? कोई बात नहीं, हम आपका एडमिशन कराएंगे। बस आपको उसके लिए हमारी कंसल्टेंसी फर्म को एक्स्ट्रा पैसे देने होंगे। यही दावा करके 2 युवकों ने लखनऊ समेत कई राज्यों के स्टूडेंट्स को फंसाया। फिर उनसे करीब 100 करोड़ रुपए ठग लिए।
इन दोनों युवकों को बुधवार को लखनऊ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इनमें एक युवक बीटेक पास है, जबकि दूसरा 12वीं तक पढ़ा है। दोनों ने बताया कि वे टैंगो नाम की एक डेटिंग एप पर सक्रिय थे। यहां से लड़कियों के नंबर जुटाते थे। इसके बाद उन्हें अपने जाल में फंसाते थे। फिर इन्हें टेली कॉलर बनाते थे।
दोनों युवकों ने प्राइवेट साइबर कंपनियों से स्टूडेंट्स का डेटा खरीद रखा था। टेली कॉलर लड़कियों से स्टूडेंट्स को कॉल करवाते थे। उन्हें पेरेंट्स के साथ अपने ऑफिस बुलाते थे। एक राज्य में ठगी करने के बाद ये लोग ऑफिस बंद कर दूसरे राज्य में नया ऑफिस खोल लेते थे।
डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया- चिनहट की कठौता झील के पास से दोनों जालसाजों को गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान बिहार के औरंगाबाद के रहने वाले प्रेम प्रकाश विद्यार्थी उर्फ अभिनव शर्मा (35 वर्ष) और समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय के रहने वाले संतोष कुमार चौरसिया (34 वर्ष) के रूप में हुई। इन लोगों ने बाराबंकी और सीतापुर के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 100% एडमिशन का भरोसा दिलाया और स्टूडेंट्स से खातों में रुपए ट्रांसफर करा लिए। इसी की शिकायत पर दोनों को पकड़ा गया। बाद में हुई पूछताछ में 100 करोड़ की ठगी का पता चला।
ऑनलाइन कंपनियों से खरीदा डेटा डीसीपी कमलेश दीक्षित ने बताया- नीट परीक्षा में जिन स्टूडेंट्स की मेरिट कम रहती है, उनको काउंसिलिंग से अच्छे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल पाता। दोनों युवक ऐसे स्टूडेंट्स का डेटा ऑनलाइन कंपनियों से खरीद लेते थे। इसके बाद फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल साइट्स पर अपनी स्टडी पाथवे कंसल्टेंसी का प्रचार (एडवरटाईज) करते थे।
स्टूडेंट्स के परिवारवालों को कॉल करके अच्छे मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का झांसा देते थे। उन्हें अपने कंसल्टेंसी ऑफिस बुलाते थे। फिर बाराबंकी के हिंद मेडिकल कॉलेज और सीतापुर के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में मैनेजमेंट कोटे की सीट की एडवांस बुकिंग कराने को कहते थे। इसके बाद पेरेंट्स से एडमिशन प्रोसेस, साल की ट्यूशन फीस और अन्य शुल्क बताकर डिमांड ड्राफ्ट, ऑनलाइन या कैश रुपए ले लेते थे। मुख्य आरोपी प्रेम शंकर विद्यार्थी ने हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के नाम से अलग-अलग बैंकों में चालू खाता (करंट अकाउंट) खुलवा रखा था। इसी में वह ठगी की रकम ट्रांसफर करता था।
आरोपी प्रेम शंकर विद्यार्थी 6 साल से बिहार के बेऊर जेल में बंद था। 6 सितंबर, 2024 को उसे यूपी के सहारनपुर में प्रोडक्शन वारंट के लिए भेजा गया था। इसके बाद वह ट्रेन से पटना लौट रहा था। इस बीच शामली के हिंद रेलवे स्टेशन के पास वह ट्रेन से कूदकर भाग गया था। उस समय उसके साथ पटना के 6 पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। प्रेम शंकर विद्यार्थी मैकेनिकल इंजीनियर है। दूसरा आरोपी संतोष चौरसिया 12वीं पास है। दोनों ठगी करने के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम और पहचान से रहते थे। दोनों लग्जरी लाइफ जीने के शौकीन हैं। ठगी से कमाए पैसों से 6 देशों- सऊदी अरब, वियतनाम, रशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और स्विट्जरलैंड की यात्रा कर चुके हैं।
प्रेम प्रकाश चिनहट स्थित एक अपार्टमेंट में किराए के पेंट हाउस में रहता था। इसके लिए 70 हजार रुपए महीना रेंट देता था। विजयंत खंड में अपना स्टडी पाथवे कंसलटेंसी का ऑफिस बनाया था। इसमें करीब 50 कर्मचारी काम करते थे। ऑफिस में काम के दौरान वह सभी कर्मचारियों के मोबाइल जमा करवा लेता था। ऑफिस में खुद बहुत ज्यादा नहीं बैठता था। किसी क्लाइंट के आने पर फोन कॉल पर पहुंच जाता था।
प्रेम प्रकाश ने वाराणसी में ठगी करने के लिए एक कंसलटेंसी फर्म खोली थी। इसकी ओपनिंग सेरेमनी में फिल्म स्टार गोविंदा को बुलाया था। इसके बाद प्रयागराज और गोरखपुर में हुई एक ओपनिंग सेरेमनी में अभिनेत्री प्रीती जिंटा को बुलाया था।
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