समस्तीपुर : शहर का स्टेशन रोड अव्यवस्थाओं से घिरा है। मालगोदाम चौक से रामबाबू चौक व थानेश्वर पैदल पूल तक दोनों ओर अतिक्रमण का बोलबाला है। आवारा मवेशियों की धमाचौकड़ी लोगों के लिए मुसीबत तो है ही लेकिन ई-रिक्शा चालकों की मनमानी से जाम लगता है। स्टेशन रोड के लोगों ने बताया कि स्टेशन चौक गेट नंबर-1 और गेट नंबर-2 पर ई-रिक्शा चालकों की अराजकता चरम पर रहती है और पुलिस प्रशासन भी मूकदर्शक बन देखती रहती है। सवारियों को ले जाने के लिए बड़ी संख्या में स्टेशन चौक पर ऑटो- ई-रिक्शा खड़े रहते हैं। सवारियां भरने के चक्कर में बीच रोड तक वाहनों को खड़ा कर देते हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। मुख्य सड़क पर बेतरतीब ढंग से खड़े होने वाले ई-रिक्शा यात्रियों के अलावा आसपास के दुकानदारों के लिए भी समस्या बन चुकी हैं।
ट्रैफिक पुलिस की गैरहाजिरी में इनकी मनमानी और बढ़ जाती है। इस मार्ग के दोनों ओर व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। इन भवनों में लोग निवास भी करते हैं। मार्ग के दोनों ओर करीब पांच सौ से अधिक दुकाने हैं। रेलवे की तरफ से खाली जमीन पर धीरे-धीरे आवारा पशुओं का बसेरा बन गया है, जो सड़कों पर टहलते रहते है जिससे जाम की भी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जाम के कारण से न सिर्फ व्यवसायी परेशान है बल्कि बाजार आने वाले लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ई-रिक्शा चालकों के कारण स्टेशन चौक पर पैदल निकलना भी मुश्किल :
स्टेशन चौक पर ई-रिक्शा का परिचालन पूरी तरह अव्यवस्थित हो गया है। स्थिति यह है कि अन्य वाहन चालकों, बाइक सवारों और पैदल चलने वालों के लिए सड़क पर निकलना मुश्किल हो गया है। इनके अनियंत्रित संचालन से आए दिन जाम की समस्या बनी रहती है और दुर्घटनाओं की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। दिनभर सड़क पर ई-रिक्शा का कब्जा नजर आता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें कई नाबालिग भी ई-रिक्शा चलाते दिख जाते हैं, लेकिन जांच या कार्रवाई कहीं नजर नहीं आती।
चालक ट्रैफिक नियमों की परवाह किए बिना मनमाने ढंग से सड़क पर दौड़ते हैं। सड़क पर आगे, पीछे या बगल का ध्यान रखे बिना ये लापरवाही से गाड़ी चलाते हैं और अक्सर बाइक सवारों की तरह लहराते हुए वाहन घुमाते हैं। कई बार हल्की टक्कर लग जाने पर चालक गाली-गलौज और मारपीट तक पर उतारू हो जाते हैं। सबसे बड़ी परेशानी तो तब होती है, जब ये गाड़ियों को स्टेशन रोड में सड़क के बीचोंबीच रोककर पैसेंजर का इंतजार करते हैं। इनकी संख्या इतनी अधिक हो चुकी है कि एक सवारी मिलने पर भी इन्हें संतोष हो जाता है। सवारी न मिलने पर खाली ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ाते रहते हैं क्योंकि इसमें ईंधन का खर्च नहीं होता। यही नहीं, जब चाहे जहां चाहें सड़क किनारे पार्किंग बना लेना भी आम बात हो गई है।
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