समस्तीपुर : भारत में पुष्प व्यवसाय के क्षेत्र में गेंदा फूल की खेती काफी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इस फूल का प्रयोग धार्मिक तथा सामाजिक अवसरों काफी वृहद रूप से किया जाता है। बिहार के किसान सितंबर से दिसंबर माह तक अपने खेतों में वैज्ञानिक विधि से गेंदा फूल की खेती कर आने वाले त्योहार के मौसम में अच्छी से अच्छी कमाई कर सकते हैं। ये जानकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र शिवहर की वैज्ञानिक डॉ. संचिता घोष ने दी।
उन्होंने कहा कि गेंदा फूल का प्रयोग शादी, जन्मदिन, पूजा और त्यौहार के अलावे सरकारी एवं निजी संस्थानों में आयोजित होने वाले विभिन्न तरह के समारोहों में काफी जोर-शोर से किया जाता है। इतना ही नहीं इस फूल का प्रयोग आजकल मुर्गी के भोजन के रूप में भी बड़े पैमाने पर किया जाने लगा है। मुर्गियों को इस फूल का सेवन कराने से मुर्गी के अंडे की जर्दी का रंग काफी पीला हो जाता है और अंडे की गुणवत्ता भी काफी बढ़ जाती हैं।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. संचिता के अनुसार सितंबर के माह में की जाने वाली गेंदा फूल की खेती किसानों के लिए अत्यंत ही लाभकारी है। इस समय में लगाएं जाने वाले गेंदा फूल के पेड़ों में नवरात्रि, दिवाली, छठ आदि जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के समय में फूल आने लगते हैं जिससे किसानों को इसका काफी अच्छा रेट मिल जाता है।
उन्होंने बताया कि किसान गेंदा की उन्नत किस्में जैसे नारंगी पुसा, बसंती पुसा, शिराकोल आदि को लगाकर बेहतर उपज और आमदनी दोनों प्राप्त कर सकते हैं। पूसा नारंगी 120 से 125 दिनों में फूल देने लगते हैं तथा यह 50 से 60 दिनों तक फूल देता रहता हैं। इसकी उपज 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर होती हैं। इसके अलावे पूसा बसंती की बात करें तो यह प्रभेद 140 से 45 दिनों में फूल देना शुरू करते हैं। उन्होंने बताया कि किसान गेंदा के फूल की लड़ी बनाकर भी पर्व त्यौहार में अच्छी कमाई कर सकते हैं।
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