30 साल पहले जगदानंद सिंह ने भी इस्तीफा दिया था। लेकिन, तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया था। वर्ष 1992 में बाढ़ के दौरान विधानसभा में सरकार पर तरह-तरह के आरोप लग रहे थे। जगदानंद ने विधानसभा में घोषणा कर दी कि यदि कोई तटबंध टूटा तो वे इस्तीफा दे देंगे।
अगले ही दिन एक तटबंध टूटने की खबर आने लगी। सदन में भारी हंगामे के बाद सरकार ने विधानसभा की कमेटी बनाकर मामले की जांच कराने का एलान किया। तत्कालीन विधायक राजो सिंह के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन कर दिया गया। हंगामे के बाद जल संसाधन मंत्री जगदानंद सिंह ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को भेज दिया। हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट दी थी कि तटबंध टूटा नहीं है बल्कि उसके हिस्से में थोड़ा कटाव हुआ है।
उधर, लालू प्रसाद यादव ने इस्तीफा राज्यपाल के पास नहीं भेजा। लंबे समय तक वैसी ही स्थिति बनी रही। मीडिया द्वारा पूछे जाने पर लालू कहते कि जगदानंद का इस्तीफा उनके तकिया के नीचे पड़ा है। उस समय नीतीश कुमार ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई। उनकी पहल पर ही मामले का पटाक्षेप हुआ। जगदानंद सिंह ने फिर से मंत्री का काम संभाला।
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