राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को मुश्किलें बढ़ गई हैं। आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव समेत 9 के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 3 और 4 के तहत चार्ज फ्रेम किए गए हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस केस में अन्य 7 आरोपियों को बरी कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी।
यह मामला लालू यादव के यूपीए सरकार में रेल मंत्री रहने के दौरान का है। आरोप है के लालू के कार्यकाल में आईआरसीटीसी के दो होटलों के संचालन का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया था। इसमें कथित अनियिमतताओं का आरोप लगा। इसके आपराधिक पहलू की जांच सीबीआई कर रही है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले का केस चलाया।
दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल जज विशाल गोगने की अदालत ने गुरुवार को आईआरसीटीसी होटल घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कुल 9 लोगों पर आरोप तय किए हैं। इनमें लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के अलावा मेसर्स लारा प्रोजेक्ट, सरला गुप्ता और प्रेम चंद गुप्ता शामिल हैं।
जज विशाल गोगने ने इस केस में 7 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि इनके खिलाफ लगे मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप पर संदेह है। उन्होंने जांच की प्रकृति, समय और तरीके पर भी सवाल उठाए। आरोपियों के वकीलों ने अदालत में तर्क दिया था कि यह केस राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।
सीबीआई केस में भी तय हो चुके हैं आरोप
इससे पहले 13 अक्टूबर 2025 को सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 1 अन्य आरोपियों पर आरोप तय किए थे। अदालत ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। अदालत का कहना है कि लालू की देखरेख में रेलवे अधिकारियों ने रांची और पुरी में आईआरसीटीसी के होटल लीज देने के लिए टेंडर में हेर-फेर की गई थी।
सीबीआई की एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि साल 2004 में लालू यादव के रेल मंत्री रहते दो आईआरसीटीसी होटल के रखरखाव का काम एक कंपनी को दिया गया था। इसके बदले में लालू परिवार को पटना में एक बेशकीमती जमीन कथित रिश्वत के तौर पर मिली थी। यह जमीन प्रेम चंद्र गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता की बेनामी कंपनी के जरिए ली गई थी।
सीबीआई केस से ही ईडी ने दर्ज की एफआईआर
सीबीआई की इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने लालू परिवार के सदस्यों एवं अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। ईडी ने कथित तौर पर शेल कंपनियों के जरिए अर्जित की गई आरोपियों की काली कमाई की जांच की।
सीबीआई केस में ये भी आरोपी
सीबीआई की एफआईआर में सुजाता होटल्स के डायरेक्टर विजय कोचर एवं विनय कोचर, डिलाइट मार्केटिंग कंपनी (वर्तमान नाम लारा प्रोजेक्ट्स) और आईआरसीटीसी के तत्कालीन एमडी पीके गोयल भी नामजद हैं। आईआरसीटीसी की रांची और पुरी स्थित होटल का जिम्मा सुजाता होटल्स ग्रुप को दिया गया था। उसी के बदले बेशकीमती जमीन लेने का आरोप है।
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