बैंकों को बिहार सरकार की सीधी चेतावनी, यहां का पैसा लोन में यहीं दो नहीं तो पैसे नहीं जमा करेंगे

बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने बैंकों को सीधी चेतावनी दी है। डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा है कि जिन बैंकों का सीडी अनुपात यानी सीडी रेशियो 50 प्रतिशत से कम रहेगा, उसमें सरकार पैसे जमा नहीं करेगी। इसका सीधा मतलब है कि बिहार में मौजूद जो भी बैंक राज्य के ग्राहकों का जमा आधे से ज्यादा धन लोन के रूप में यहीं के निवासियों को नहीं देंगे, तो सरकार उनसे लेनदेन बंद कर देगी। सम्राट सरकार ने भी बैंकों से अपना सीडी रेशियो बढ़ाने को कहा है।
डिप्टी सीएम बिजेंद्र यादव ने मंगलवार को राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की 96वीं एवं 97वीं संयुक्त त्रैमासिक बैठक को संबोधित किया। पटना के एक होटल में आयोजित बैठक में राज्य सरकार और बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। डिप्टी सीएम ने बैंकों को अधिक से अधिक लोन देने, वार्षिक साख योजना (एसीपी) लक्ष्य को हासिल करने और सीडी रेशियो बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में नाबार्ड की ओर से 3 लाख 36 हजार करोड़ रुपये के पूर्व के एसीपी को बढ़ाकर 4 लाख 95 हजार करोड़ किए जाने का प्रस्ताव पेश किया गया।

क्या होता है सीडी रेश्यो?
इसे क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो कहते हैं। इससे यह पता लगाया जाता है कि बैंकों में जनता का जमा धन का कितना हिस्सा लोन के रूप में वापस जनता को दिया जा रहा है। घर, वाहन, व्यापार समेत अन्य जरूरतों के लिए आम ग्राहकों और कारोबारियों को कर्ज देते हैं। आसान भाषा में समझें तो किसी बैंक में अगर ग्राहकों के 100 रुपये सेविंग अकाउंट, चालू खाता, एफडी, आरडी जैसी स्कीमों के तहत जमा हैं। उस बैंक ने 50 रुपये विभिन्न लोन के तहत लोगों को बांट रखे हैं। तो उस बैंक का सीडी रेशियो 50 प्रतिशत होगा।

बिहार का सीडी रेशियो कितना है?
इस बैठक में बैंक के अधिकारियों ने सरकार को बताया कि बिहार का सीडी रेश्यो वर्तमान में 60.21 प्रतिशत है। यानी कि बिहार के बैंकों में अगर ग्राहक 100 रुपये जमा करा रहे हैं, तो उन्हें विभिन्न तरह के लोन के माध्यम से सिर्फ 60 रुपये ही मिल रहे हैं। जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 80 फीसदी है। अर्थव्यवस्था में 70 से 75 प्रतिशत का सीडी रेशियो उचित माना जाता है।
प्रशांत किशोर ने उठाया था मुद्दा
जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर अक्सर राज्य के बैंकों का सीडी रेशियो बहुत कम होने का मुद्दा उठाते रहे हैं। अपनी जन सुराज यात्रा और बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने इस मुद्दे पर एनडीए सरकार को घेरा था। उन्होंने लोगों को समझाया था कि बिहार का सीडी रेशियो बहुत कम है, जिसका मतलब है कि राज्य के लोगों का बैंकों में जमा पैसा यहां के लोगों को रोजगार या अन्य जरूरतों के लिए नहीं मिल पाता है। पीके ने आरोप लगाया था कि बिहार के लोगों का बैंकों में जमा पैसा दूसरे राज्यों के लोगों को लोन के रूप में बांटा जाता रहा है। इससे बिहार पिछड़ रहा है, जबकि दूसरे राज्य विकसित हो रहे हैं।

हालत में सुधार, बढ़ रहा सीडी रेशियो
हाल के कुछ सालों में बिहार के बैंकों का सीडी रेशियो सुधरने लगा है। साल 2020 में सीडी रेशियो 50 प्रतिशत से नीचे थे। साल 2022 में यह बढ़कर पहली बार 50 फीसदी से ऊपर चला गया। इसके बाद इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। साल जून 2026 में यह 60 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है। बिहार सरकार की बैंकों को सीधी चेतावनी के बाद इसमें और सुधार आने की उम्मीद है।


