बिहार में हर डेढ़-दो साल पर CM की शपथ क्यों? 15 साल में 10 वीं बार बनेगी नई सरकार

नीतीश कुमार आज मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। कल यानी 15 अप्रैल को भाजपा की सरकार बन जाएगी। 2025 विधानसभा चुनाव में दो तिहाई से अधिक बहुमत से जीते NDA की सरकार बने अभी 5 महीने ही हुए थे कि एक बार फिर सरकार बनने की कवायद की जा रही है।
दरअसल, बीते 15 साल से बिहार की यह नियती ही बन गई है। सदन में बहुमत के बावजूद हर डेढ़-दो साल पर मुख्यमंत्री शपथ ले रहे हैं। मतलब सरकार बदल रही है। बीते 15 सालों में मुख्यमंत्री की यह 10वीं शपथ होगी।


15 साल में 9 बार मुख्यमंत्री की शपथ, कल 10वीं बार
- 2010: एनडीए की बड़ी जीत के बाद तीसरी बार मुख्यमंत्री बने
- 2014: लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद इस्तीफा, 20 मई को Jitan Ram Manjhi बने सीएम
- 2015: मांझी के हटने के बाद फिर वापसी, फिर नवंबर में महागठबंधन के साथ भारी जीत
- 2017: महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ नई सरकार

- 2020: एनडीए के साथ फिर सत्ता में वापसी
- 2022: भाजपा से अलग होकर राजद के साथ सरकार बनाई
- 2024: राजद से अलग होकर फिर भाजपा के साथ सरकार
- 2025: एनडीए की जीत के बाद 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ

सरकारें बदली, लेकिन लोगों की हालत नहीं सुधरे
- आर्थिक सर्वे 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, प्रति व्यक्ति आय 76,490 रुपए सलाना है। मतलब 6,374 रुपए महीना। यह देश के 34 राज्यों में सबसे कम है।
- बिहार सरकार पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है। आर्थिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक राज्य सरकार पर 3,74,134 करोड़ रुपए कर्ज था। जो राज्य के GSDP का 37.7% है।
- भारत सरकार के आर्थिक सर्वे रिपोर्ट-2026 के मुताबिक, राज्य में हर में हर 100 में से 30 बच्चे 9-10वीं के बीच पढ़ाई छोड़ दे रहे हैं। जो देश में सबसे ज्यादा है।

- टीचर-स्टूडेंट रेशियो भी गड़बड़ है। 38 स्टूडेंट पर सिर्फ एक टीचर हैं। हेल्थ सेक्टर में भी खराब स्थिति है। एक लाख लोगों पर 1 डॉक्टर और 21 बेड है।
- आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2023–24 के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल करीब 30 लाख मजदूर काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं।
- PLFS (अप्रैल–जून 2025) के आंकड़ों के मुताबिक, हर काम करने वाले 100 लोगों में से सिर्फ 30 लोगों के पास ही काम है। जबकि, 70 लोग बिना काम के घूम रहे हैं।
- रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार का भारत के विनिर्माण उत्पादन में योगदान लगभग शून्य है। भूमि, आधारभूत ढांचे और निवेश की कमी ने इंडस्ट्री को रोक दिया है।

सरकार बदली तो नेताओं की संपत्ति कई गुना तक बढ़ी
- नीतीश कुमारः 2015 के आंकड़ों के मुताबिक, नीतीश कुमार की कुल संपत्ति (चल औऱ अचल) 58.97 लाख रुपए थी। 2025 में उनकी संपत्ति 1.65 करोड़ रुपए हो गई। मतलब दो गुनी से थोड़ी अधिक।
- तेजस्वी यादवः 2015 में तेजस्वी की कुल प्रॉपर्टी 1.18 करोड़ रुपए थी, जो 2025 में बढ़कर 8 करोड़ 98 हजार 877 रुपए हो गई। मतलब 8 गुना ज्यादा।
- सम्राट चौधरीः 2010 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, सम्राट की टोटल संपत्ति 30,29,833 रुपए थी। 2025 के हलफनामे के मुताबिक, 6.38 कराेड़ रुपए हो गई। मतलब 21 गुना अधिक।

- विजय चौधरीः 2016 के आंकड़ों के मुताबिक, चौधरी की संपत्ति 92,78,252 रुपए थी। जो 2025 में बढ़कर 3.13 करोड़ रुपए की हो गई। मतलब 3 गुना की बढ़ोत्तरी।
- बिजेंद्र प्रसाद यादवः 2015 के आंकड़ों के मुताबिक, बिजेंद्र यादव 1.15 करोड़ रुपए के मालिक थे। 2025 में कुल संपत्ति 3.48 करोड़ रुपए की हो गई। मतलब 3 गुना ज्यादा।
- अशोक चौधरीः बिहार के सबसे अमीर मंत्री डॉ. अशोक चौधरी हैं। 2025 में उनकी कुल संपत्ति 42.68 करोड़ रुपए है। जबकि, जब पहली बार मतलब 2015 में मंत्री बने थे तब उनकी चल संपत्ति 1.03 करोड़ रुपए थी। अचल संपत्ति नहीं थी। मतलब 10 साल में 42 गुना संपत्ति बढ़ी।
