प्रवासी मजदूरों की मृत्यु या दुर्घटना के कारण मृत्यु होने पर अब उनके परिजनों को दो लाख का अनुदान मिलेगा। पहले अनुदान की राशि सिर्फ एक लाख रुपए थी। इस योजना के दायरे में बिहार के बाहर रह रहे 40 लाख अप्रवासी मजदूर आएंगे। राज्य मंत्रिपरिषद ने मंगलवार को इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 9 प्रस्तावों पर मुहर लगी।
बैठक के बाद कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने बताया कि प्रवासी मजदूरों की मृत्यु पर दो लाख जबकि दुर्घटना के कारण स्थायी पूर्ण अपंगता की स्थिति में 75 हजार की जगह एक लाख और स्थायी आंशिक अपंगता की स्थिति में 37500 रुपए की जगह 50 हजार रुपए का अनुदान दिया जाएगा। दरअसल, राज्य सरकार द्वारा बिहार के बाहर या विदेशों में असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले श्रमिकों के कल्याणार्थ बिहार राज्य प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना, 2008 का संचालन किया जा रहा है। अनुदान की राशि का निर्धारण 1 अप्रैल 2011 को किया गया था। लिहाजा उसके प्रावधान में संशोधन कर राशि बढ़ाई गई है।
एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले के तहत जीविका दीदियों को शहरों में भी काम करने की जिम्मेवारी सौंपी गयी है। इसके लिए वे स्वयं सहायता समूहों का गठन करेंगी। अभी तक जीविका सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में ही काम कर रही थी। नए प्रावधान के तहत वे अब ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी काम करेंगी। इसके लिए नगर विकास विभाग जीविका के साथ एमओयू करेगा।
इसी तरह वैशाली के राघोपुर और सारण के गरखा में आईटीआई स्थापित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गयी। इसके लिए 86 अतिरिक्त पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गयी, जिस पर प्रतिवर्ष 4.69 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
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