अब आंध्र प्रदेश नहीं, बिहार में मछली पालन की सफलता के बारे में अन्य राज्यों के मछुआरे जान सकेंगे। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को लेकर केंद्र सरकार इन दिनों प्रमुख जिलों में मत्स्य पालन की योजनाओं की जांच करा रही है। इसके लिए केंद्रीय टीम भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, खगड़िया, अररिया, जमुई और सुपौल जिले में सर्वे कर रही है। यह टीम जिलों के प्रमुख हेचरी, तालाब आदि का स्पॉट वेरिफिकेशन कर मछुआरों से मछली उत्पादन के तरीके, दिक्कत, देखभाल आदि की जानकारी ले रही है। दो दिन पहले टीम बिहपुर गई थी जहां हेचरी के नए तरीकों की जानकारी ली। यहां दियारा क्षेत्र में मछली की ब्रीडिंग के तरीके जानने के बाद उसकी देखभाल की वीडियो रिकार्डिंग भी की गई है।
जिला मत्स्य पदाधिकारी कृष्ण कन्हैया ने बताया कि बिहार सरकार द्वारा भी भागलपुर में मछली पालन की सफलता का सर्वे कराया जा रहा है। बिहपुर में हेचरी निर्माण के लिए नदी के चौर क्षेत्र में बोट फ्लोटिंग से मछली उत्पादन हो रहा है। यहां मछली की गिनती से लेकर उनके व्यवहार आदि तक की निगरानी होती है।
पिछले साल यहां देसी नस्ल की मछलियों की ब्रीडिंग हुई थी। जो अब आकार लेने लगी है। इस हेचरी से कई मत्स्य कृषकों को रोजगार मिला है। अब केंद्र सरकार इन मछुआरों की सक्सेस स्टोरी छाप कर दूसरे राज्यों के मछली उत्पादकों को बताएगी। टीम ने फिशरीज प्रोडक्शन की वीडियो फिल्म भी बनाई है। इसे देश भर में प्रसारित-प्रचारित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि मछली उत्पादन में कटिहार, मधुबनी, दरभंगा, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण का राज्य में अभी भी 39.4% योगदान है। भागलपुर, खगड़िया आदि में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। वैसे, 34.50 लाख टन मछली उत्पादन कर आंध्र प्रदेश अभी भी देश में सर्वोच्च स्थान पर है।
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