बिहार में महागठबंधन सरकार का सबसे खुला अंदरूनी विवाद बन चुके आरजेडी विधायक और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह चुप होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। तेजस्वी यादव के यह कहने के बाद भी कि कोई अगर नीतीश कुमार या महागठबंधन सरकार के खिलाफ बोल रहा है तो वो बीजेपी के एजेंडे पर चल रहा है, सुधाकर सिंह के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। बुधवार को तो जगदानंद सिंह ने भी बेटे के बयान पर कह दिया कि इस तरह का बयान बर्दाश्त करने लायक नहीं है। फिर भी सुधाकर सिंह बोले ही जा रहे हैं। अब सुधाकर सिंह ने कहा है कि एक तो वो अपनी पार्टी लाइन के खिलाफ कुछ नहीं बोल रहे हैं और दूसरा कि नीतीश कुमार महागठबंधन की सरकार बनाने के बाद भी बीजेपी के रास्ते पर चल रहे हैं।
सुधाकर सिंह ने कहा कि वो जो कह रहे हैं वो कोई नया नहीं है और ना ही किसी भी तरह से पार्टी लाइन के खिलाफ है। उन्होंने कहा- “महागठबंधन और बीजेपी के बीच जो मूल नीतिगत अंतर है वो किसानों का मसला है और सीएए व एनआरसी का मसला है। मैं किसानों का मुद्दा उठा रहा हूं जो आरजेडी के आर्थिक और राजनीतिक प्रस्ताव का हिस्सा है। मुझे अगर बीजेपी से कोई मतलब होता तो मैं किसानों की बात क्यों करता। जो आदमी बीजेपी के साथ 17 साल रहा और अभी भी उन्हीं पुरानी नीतियों पर सरकार चला रहा है, उनको बताना चाहिए कि बीजेपी के साथ उनकी कोई भीतरी सहमति है क्या।”
सुधाकर सिंह ने कहा कि जैसे नीतीश कुमार ने उनको कैबिनेट से बाहर किया, वैसे ही वो आरजेडी से भी निकलवाना चाहते होंगे लेकिन ये सब उनके लिए मायने नहीं रखता क्योंकि वो राजनीति में मालिक को खुश रखने की नौकरी के लिए नहीं आए हैं।
सुधाकर सिंह ने कहा- “मैंने किसानों के ज्वलंत सवाल उठाए हैं और मेरी पार्टी के टॉप नेता लालू यादव, तेजस्वी यादव और मेरे पिता जगदानंद सिंह, सबने भरोसा दिया है कि सही समय पर इन बातों को सुना जाएगा। मैं उस सही समय का इंतजार कर रहा हूं जो बड़ी तेजी से भाग रहा है। अगर मंडी सिस्टम बहाली नहीं करनी है, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं देना है, टाल क्षेत्र का विकास नहीं करना है, गन्ना किसानों की समस्या का समाधान नहीं करना है तो नीतीश कुमार कह सकते हैं।”
जब सुधाकर सिंह से एचटी ने पूछा कि क्या नीतीश कुमार के खिलाफ उनकी लगातार बयानबाजी आरजेडी की सोची-समझी रणनीति है जिससे नीतीश पर दबाव बनाकर मुख्यमंत्री का पद तेजस्वी यादव के लिए हासिल किया जा सके तो उन्होंने जवाब दिया- ” ये तो महागठबंधन सरकार बनने के समय से ही पता है। सिर्फ तारीख नहीं पता थी। ये तो नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच का मसला है। मैं पार्टी का एक छोटा कार्यकर्ता हूं और अपने आप को किसानों के मसले तक समेट कर रखा है। मैं किसी पद का दावेदार नहीं हूं।”
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