Bihar

बिहार में एक गांव ऐसा भी…ग्रामीण चलाते हैं थाना और कोर्ट, आजादी के बाद एक भी FIR नहीं

बिहार में एक तरफ जहां थानों में अपराध और आपसी विवाद के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. गांव में छोटे सी विवाद में लोग थाने पहुंच रहे हैं तो वहीं बिहार में एक गांव ऐसा भी है जहां थाना और कोर्ट पहुंचने से पहले ही विवाद संबंधित सभी मामले सुलझ जाते हैं. ये गांव जहानाबाद जिला में है जहां के लोगों ने नजीर पेश की है. इस गांव में आजादी के बाद से कोई भी मामला थाने तक नहीं पहुंचा.

घोसी प्रखंड स्थित लखावर पंचायत के धौताल बिगहा गांव को लोग आज पूरे इलाके में आदर्श गांव के रूप में देखते हैं. आजादी के बाद से ही आपसी विवाद को लेकर कभी गांव के लोग थाने नहीं गए. गांव के किसी भी शख्स ने आपसी लड़ाई को लेकर थाने में एफआईआर तक दर्ज नहीं करायी है. गांव के शांति प्रिय लोगों ने विवाद की सूरत में भी मिसाल पेश की और बिना कोर्ट गए ही मामले का निपटारा कर लिया.

वॉर्ड सदस्य और पंच भी निर्विरोध

तकरीबन 100 घरों वाला यह गांव इलाके के लोगों के लिए एक मिसाल है. घोसी प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव आज के जमाने से एकदम अलग है. गांव के लोगों ने बताया कि गांव एकता के सूत्र में इसी तरह से बना है कि पंचायत चुनाव में भी वार्ड एवं पंच पद से निर्विरोध चुनाव जीत जाते हैं.

आपसी सहमति से निपटाते हैं विवाद

अगर गांव में किसी बात को लेकर विवाद होता भी है तो उसे आपस में ही निपटा लिया जाता है. गांव में आज तक कोई ऐसा बड़ा, जटिल और गंभीर तरह का विवाद नहीं हुआ है, जिसे सुलझाने के लिए थाना या कोर्ट कचहरी जाने की नौबत आए. छोटे-मोटे विवाद गांव के बड़े बुजुर्ग की पहल कर निपटा लिया जाता है. गांव के कुछ बुजुर्ग आपस में विवाद होने पर तुरंत हस्तक्षेप करते हैं. दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर सुलह करा देते हैं.

बकरी पालन को लेकर हुआ विवाद तो ये काम छोड़ दिया

वॉर्ड से जीते पंच बताते हैं कि लगभग 50 साल पहले यहां एक बकरी को लेकर विवाद हुआ था. इसके बाद ग्रामीणों ने बकरी पालना ही छोड़ दिया. दरअसल पहले  ग्रामीण सैकड़ों की संख्या में बकरी पालन किया करते थे, लेकिन तब विवादों का कारण  बने बकरी पालन से ग्रामीणों ने तौबा कर लिया.

मुखिया ने इसे अनूठी परंपरा बताया

पंचायत के मुखिया विजय साव ने बताया कि यह किसी भी गांव के लिए एक बेहद अच्छी परंपरा है. अन्य गांवों के लोगों को भी इसी तरह विवाद को आपस में सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए. अपने स्तर से गांव के कुछ जिम्मेदार बुजुर्गों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने के लिए प्रयास करूंगा. गांव के ही पंचायत समिति सदस्य भी इसी बात पर बल देते हैं.

Avinash Roy

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