समस्तीपुर :- भारत-नेपाल परियोजना के तहत प्रथम चरण में नव आमान परविर्तित जयनगर-जनकपुर धाम-कुर्था रेलखंड पर ट्रेन सेवा की पुनर्बहाली होगी। इस रेलखंड पर भारत के जयनगर एवं नेपाल के इनरवा स्टेशन पर कस्टम चेकिग प्वाइंट बनाया गया है। भारत से नेपाल के जनकपुर धाम जाने वाले तीर्थ यात्रियों को काफी सुविधा होगी। इस रेल सेवा के शुरू हो जाने के बाद न केवल यात्रा सुगम होगी बल्कि व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटकों के आवागमन में भी सुविधा होगी एवं सीमावर्ती क्षेत्र का तेजी से विकास होगा। जयनगर-बिजलपुरा-बर्दीबास रेल परियोजना बिहार के मधुबनी जिला एवं नेपाल के धनुसा, महोतारी और सिरहा जैसे कृषि योग्य एवं सघन आबादी वाले जिले से गुजरता है। प्रथम चरण में पूर्ण जयनगर-कुर्था रेलखंड के बीच इनरवा स्टेशन, खजुरी स्टेशन, महिनाथपुर हॉल्ट, बैदेही स्टेशन, परवाहा हॉल्ट, जनकपुर धाम स्टेशन बनाए गए हैं।
भारत वर्षों से नेपाल का स्थाई विकास का साझेदार रहा है। भारत और नेपाल हिमालय पर्वत से जुड़े हैं। तराई के खेत-खलिहानों, छोटी-बड़ी दर्जनों नदियों और खुली सीमा से भी जुड़े हुए हैं। लेकिन बदलते परि²श्य में सिर्फ इतना ही काफी नहीं है और यह दोनों देश के लिए अत्यंत गौरव की बात है कि भारत और नेपाल दो अप्रैल को एक बार पुन: रेलवे से जुड़ जाएंगे।
यह सिर्फ एक रेल सेवा ही नहीं होगी बल्कि यह दोनों देशों की सदियों पुराने द्विपक्षीय रिश्तों को प्रगाढ़ करने के साधन के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। दोनों देशों के रिश्तों में और मजबूती आए, इसके लिए कनेक्टिविटी अहम है। यही कारण है कि भारत और नेपाल के बीच कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गई है। जिससे आर्थिक संपन्नता के साथ-साथ आपसी संपर्क भी बढेगा।
भारत और नेपाल के बीच लगभग 784 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्माणाधीन जयनगर-बिजलपुरा-बर्दीबास (69.08 किमी) रेल परियोजना के तहत प्रथम चरण में नव आमान परिवर्तित 34.50 किलोमीटर लंबे जयनगर-जनकपुर धाम-कुर्था (नेपाल) रेलखंड पर ट्रेन का परिचालन पुनर्बहाल किया जाएगा। इस परियोजना के पहले चरण में समस्तीपुर रेल मंडल जयनगर स्टेशन को नेपाल के कुर्था से जोड़ा जा रहा है। कुर्था से बीजलपुरा तक लगभग 18 किलोमीटर लंबी रेलखंड का भी कार्य लगभग पूरा किया जा चुका है। जबकि बीजलपुरा से बर्दीबास तक लगभग 16 किलोमीटर लंबे रेलखंड के निर्माण का कार्य नेपाल सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के उपरांत प्रारंभ कर दिया जाएगा। यह परियोजना दोनों देशों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
वर्ष 1937 में भारत के जयनगर और नेपाल के बैजलपुर के मध्य नैरो गेज पर ट्रेनों के परिचालन की शुरूआत की गयी थी। वर्ष 2001 में नेपाल में आयी भीषण बाढ़ त्रासदी में कुछ रेल पुलों के बह जाने के कारण नेपाल में जनकपुर से आगे ट्रेन सेवा बंद करना पड़ा था। जबकि जनकपुर से जयनगर तक मार्च 2014 तक ट्रेनों का परिचालन जारी रहा। भारत एवं नेपाल सरकार के आपसी समझौता के तहत जयनगर-बैजलपुरा-बर्दीबास के बीच नई बड़ी रेल लाईन स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यह परियोजना भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित है।
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