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समस्तीपुर के 134 विद्यालयों की 7844 डिसमिल जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा, कहीं चल रहा प्रिंटिंग प्रेस तो कहीं हो रही खेती

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समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था और सरकारी संपत्तियों की बदहाली की पोल खोलने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। जिले के सभी 20 प्रखंडों के 134 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों की कुल 7844.62 डिसमिल बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं और स्थानीय लोगों ने अवैध कब्जा जमा रखा है। हैरानी की बात यह है कि इन जमीनों पर सिर्फ झोपड़ियां ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक दुकानें और धड़ल्ले से खेती भी की जा रही है, जबकि मासूम बच्चे खेलकूद और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, अतिक्रमण का यह काला खेल सबसे ज्यादा समस्तीपुर प्रखंड में फैला हुआ है, जहां अकेले 40 विद्यालयों की 2946.5 डिसमिल जमीन पर अवैध कब्जा है। इसके अलावा मोरवा में एक विद्यालय की 1124.8 डिसमिल, पूसा में 10 विद्यालयों की 758.25 डिसमिल और उजियारपुर में 19 विद्यालयों की 564.3 डिसमिल जमीन पर दबंगों का शिकंजा कसा हुआ है। रोसड़ा, हसनपुर, विद्यापतिनगर, विभूतिपुर और सरायरंजन समेत अन्य प्रखंडों में भी दर्जनों स्कूलों की जमीनें खतरे में हैं। मध्य विद्यालय धुरलख का कुल रकबा 10 एकड़ है जबकी अधिकांश भूमि अतिक्रमित है।

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अतिक्रमण का दायरा देखकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े होते हैं। समस्तीपुर शहर के काशीपुर स्थित तिरहुत एकेडमी की दो डिसमिल जमीन पर पिछले 20 साल से अवैध रूप से प्रिंटिंग प्रेस की दुकान चल रही है। मॉडल उच्च विद्यालय की 30 डिसमिल जमीन 19 साल से अतिक्रमित है। स्थिति इतनी दयनीय है कि मध्य विद्यालय बेला पचरुखी की 100 डिसमिल जमीन पर खुलेआम खेती की जा रही है, वहीं उच्च माध्यमिक विद्यालय बेझाडीह, भुसारी और भूईधारा जैसे स्कूलों में ग्रामीणों ने स्थायी झोपड़ियां बना ली हैं।

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मामले के तूल पकड़ने के बाद बिहार शिक्षा परियोजना और जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने सख्त रुख अपनाया है। सभी प्रखंडों के अंचल अधिकारियों (CO) को पत्र भेजकर विद्यालयों की भूमि का तत्काल सीमांकन करने और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि बच्चों के पठन-पाठन और खेलकूद के लिए विद्यालय परिसर की जमीन को हर हाल में मुक्त कराया जाए ताकि भविष्य में शिक्षण कार्य बाधित न हो।

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