समस्तीपुर के 19 विभिन्न म्यूल अकाउंट में अरबो रूपये होल्ड, अन्य बैंक अकाउंटो की जांच में जुटी साइबर पुलिस

समस्तीपुर : देश के विभिन्न राज्यों में होने वाली साइबर ठगी के रुपये समस्तीपुर जिले के विभिन्न बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किए जा रहे हैं। साइबर अपराधी स्थानीय लोगों के बैंक खातों को किराये पर लेकर ठगी की रकम इधर-उधर भेज रहे हैं। इसके बदले खाताधारकों को कुल राशि का करीब साढ़े तीन से चार प्रतिशत तक कमीशन दिया जा रहा है। समस्तीपुर साइबर थाने की पुलिस जिले के विभिन्न बैंकों में संदिग्ध खातों की जांच में जुटी हुई है। जानकारी के अनुसार अब तक 40 से अधिक बैंक खातों की जांच की जा चुकी है। जांच के दौरान 19 ऐसे म्यूल अकाउंट को चिन्हित किया गया है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने में किया जा रहा था। पुलिस इन खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में जुटी हुई है।

बताया जा रहा है कि चिन्हित किए गए कई म्यूल अकाउंट में विदेशों से भी रुपये ट्रांसफर हो रहे थे। खाताधारक घर बैठे केवल अपना बैंक खाता उपलब्ध कराकर हर महीने लाखों रुपये कमीशन के रूप में कमा रहे थे। साइबर अपराधी इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को तेजी से अलग-अलग जगहों पर भेजने के लिए कर रहे थे, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके। साइबर थाने की जांच में यह भी सामने आया है कि इन खातों में करोड़ों रुपये का फ्रॉड राशि ट्रांजैक्शन हुआ है। किसी खाते में करीब 70 करोड़ रुपये तो किसी खाते में 50 करोड़ रुपये तक की राशि होल्ड की गई है।

समस्तीपुर साइबर पुलिस द्वारा 19 ऐसे म्यूल अकाउंट चिन्हित किये गये है जिनमें हर अकाउंट में करोड़ों रुपये का अवैध ट्रांजेक्शन हुआ है। पुलिस ऐसे खातों के ट्रांजैक्शन डिटेल, लाभुकों और संबंधित नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। बताया जाता है कि बैंककर्मियों से मिलीभगत कर म्यूल अकाउंट खोले जा रहे हैं। हाल ही में एक मामला सामने आया था, जिसमें एक खाताधारक अपना बैंक खाता बंद होने के बाद खुद को निर्दोष बताते हुए साइबर थाने पहुंचा था। उसके खाते में करीब 15 करोड़ रुपये होल्ड थे।

पूछताछ के दौरान साइबर डीएसपी दुर्गेश दीपक ने जब रकम के स्रोत और ट्रांजैक्शन के बारे में जानकारी मांगी तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद पुलिस को उसके खाते के साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े होने का संदेह गहरा गया। साइबर डीएसपी दुर्गेश दीपक ने बताया कि जिले में ऐसे कई और संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। ऐसा करना कानूनन अपराध है और इसमें संलिप्त पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

साइबर अपराधियों के चंगुल में फंस रहे हैं लोग :
जाने- अनजाने खाताधारक साइबर अपराधियों के चंगुल में फंस रहे हैं। साइबर अपराधियों के नेटवर्क में शामिल उनके एजेंट कमीशन के लालचियों की ताक में रहते हैं। उन्हें झांसे में देकर साइबर फ्रॉड के रूपये के बैंक खातों में मंगवाए जाते हैं, जिससे साइबर फ्रॉड की पहचान छिपी रहे। लोगों के बैंक खातों में रूपये ट्रांजेक्शन के ऐवज में उन्हें भारी कमीशन अथवा किराया देने का भरोसा दिया जाता है। मसलन अनजान व्यक्तियों को बैंक खातों का डिटेल देने से परहेज आवश्यक है। अगर बिना जानकारी के खाते में अनजान स्रोत से रूपये आ जाएं तो इसकी तत्काल जानकारी संबंधित बैंक एवं पुलिस को देना चाहिए। साइबर अपराधी छोटे-छोटे एवं निजी बैंकों में म्यूल खातों का संचालन करवा रहे हैं। इसके पीछे खास वजह यह होती है कि ये बैंक करेंट अकाउंट खोलने में भी गहरा सत्यापन नहीं करते हैं।

बता दें कि कुछ पैसे या कमीशन के लालच में लोग अपना खाता, एटीएम, सीम कार्ड आदि दूसरे को दे देते हैं। इसमें साइबर फ्रॉड का रुपए आता है। ऐसे अकाउंट को म्यूल अकाउंट कहा है। सीसीएसयू की तरफ से साइबर प्रहार 2 प्वाइंट ओ के तहत समस्तीपुर साइबर थाने को म्यूल अकाउंट की जांच कर कार्रवाई का निर्देश मिला था। इसके आधार पर जिले में 19 म्यूल अकाउंट अब तक चिन्हित किये जा चुके हैं। साइबर डीएसपी ने बताया की आगे और भी ऐसे अकाउंट की जांच चल रही है। जिले में म्यूल अकाउंट की संख्या में इजाफा हो सकता है। सभी पर विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

अंजान को डेटा शेयर करने से करें परहेज :
साइबर ठगी के इस जमाने में फोन के जरिए बैंक डिटेल, ओटीपी, पैन कार्ड नंबर, आधार कार्ड नंबर मांगने का ट्रेंड बढ़ा है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इन फोन कॉल पर भरोसा करने की बजाय उसका सत्यापन कर लेना चाहिए। अंजान लोगों के फोन कॉल से परहेज करने के साथ उन्हें इस तरह के डेटा शेयर करने से बचना चाहिए। वहीं किसी भी अंजान व्यक्ति के ऑथेंटिकेशन डिवाइस पर फिंगर देने से परहेज करना चाहिए।

बयान :
अगर कोई व्यक्ति कुछ पैसे या कमीशन के लालच में दूसरे व्यक्ति को अपना खाता, एटीएम, सीम कार्ड आदि दिए हैं और उसमें होल्ड लगा है, जिसमें साइबर फ्रॉड का रुपए आता है तो वैसे लोग अविलंब साइबर थाना आए। अगर आप साइबर थाना नहीं आते हैं तो बहुत जल्द साइबर थाना आपके पास जाएगी। नहीं आने पर साइबर थाना ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई करेगी।
– दुर्गेश दीपक, साइबर डीएसपी, समस्तीपुर


