विजय सिन्हा के डिप्टी CM की कुर्सी तो गई ही, अब पोर्टफोलियो में भी कटौती?

बिहार की राजनीति में पावर गेम और विभागों के फेरबदल ने एक बार फिर सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता विजय कुमार सिन्हा को लेकर हो रहे हालिया बदलावों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कभी नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री के तौर पर दबदबा रखने वाले विजय कुमार सिन्हा के पोर्टफोलियो में कटौती को सत्ता के भीतर बदलसे समीकरणों के तौर पर देखा जा रहा है।
विजय कुमार सिन्हा का सफर पिछले कुछ समय में काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। एनडीए सरकार के पिछले स्वरूप में वे न केवल उपमुख्यमंत्री थे, बल्कि उनके पास भूमि एवं राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी भी थी। लेकिन नई व्यवस्था और मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के बाद उनसे उपमुख्यमंत्री का पद छिन गया। राजनीति के जानकारों का मानना था कि शायद उन्हें किसी बेहद प्रभावशाली विभाग के जरिए काॅम्पन्सेट किया जाएगा, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का जाना महत्वपूर्ण
कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे में विजय कुमार सिन्हा से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग भी वापस ले लिया गया है। बिहार जैसे राज्य में यह विभाग सीधा जनता से जुड़ा और बेहद रसूख वाला माना जाता है। इस विभाक का उनके हाथ के निकलना उनके राजनीतिक कद के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब उनके पास तुलनात्मक रूप से कम ग्लैमरस विभाग रह गया है।

क्या है इस बदलाव के मायने
इस बदलाव के पीछे कई रणनीतिक कारण हो सकते हैं। पार्टी की नई रणनीति के तहत बीजेपी शायद नए चेहरों को आगे बढ़ाने या जातीय समीकरणों को नए सिरे से साधने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अक्सर गठबंधन सरकारों में विभागों का फेरबदल आपसी तालमेल बिठाने के लिए किया जाता है।

फिलहाल विजय कुमार सिन्हा के समर्थकों के बीच इस बात को लेकर मायूसी है, लेकिन बिहार की राजनीति में इसे सम्राट युग के बढ़ते प्रभाव और पुराने दिग्गजों के धीरे-धीरे नेपथ्य में जाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। क्या यह उनके राजनीतिक भविष्य का ढलान है या किसी बड़े धमाके के पहले की शांति, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।


