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NEET छात्रा मामला में CBI की बड़ी लापरवाही! समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं किया, हॉस्टल संचालक मनीष रंजन को मिली जमानत

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नीट (NEET) छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में सीबीआई की बड़ी लापरवाही सामने आई है. इस मामले की जांच कर रही सीबीआई समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी, जिसके चलते मुख्य आरोपी को जमानत मिल गई है. आरोपी मनीष कुमार रंजन को पॉक्सो कोर्ट से राहत मिली है, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है. जानकारी के अनुसार, सीबीआई 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही. वहीं नीट छात्रा मामले मे पीड़िता के वकील ने कहा कि कोर्ट के आदेश की अवहेलना की गयी. सीबीआई ने 90 दिनों तक कोर्ट में चार्जशीट नहीं पेश किया. कोर्ट ने कई बार सीबीआई को आदेश दिया, लेकिन सीबीआई ने रूचि नहीं दिखाई. पीड़िता के वकील ने कहा कि आगे न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे.

नियमावली के तहत समयसीमा में चार्जशीट नहीं दाखिल होने पर आरोपी को जमानत का अधिकार मिल जाता है. इसी आधार पर अदालत ने मनीष रंजन को जमानत दे दी. मामले में यह भी सामने आया है कि मनीष रंजन शम्भू गर्ल्स हॉस्टल का मालिक है, जहां से यह पूरा मामला जुड़ा हुआ है. पटना पुलिस ने उसे 14 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद केस की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी.

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सीबीआई की इस चूक को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. पीड़ित पक्ष और आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है कि इतनी गंभीर मामले में जांच एजेंसी समयसीमा का पालन नहीं कर सकी. फिलहाल आरोपी को जमानत मिलने के बाद केस की आगे की सुनवाई जारी रहेगी. अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी आगे क्या कदम उठाती है और पीड़ित को न्याय कब तक मिल पाता है.

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पटना का शंभू गर्ल्स हॉस्टल कांड क्या है? जानें पूरी कहानी

बिहार की राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में 6 जनवरी 2026 को जहानाबाद जिले की रहने वाली 17-18 वर्षीय नीट छात्रा अपने कमरे में बेहोश हालत में मिली. नीट की तैयारी कर रही नाबालिग छात्रा को तुरंत अस्पताल ले जाया गया. जहां एक से दूसरे अस्पताल में रेफर होने के बाद 11 जनवरी 2026 को उसकी मौत हो गई. परिवार ने आरोप लगाया कि छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न (रेप) किया गया और फिर हत्या कर दी गई. पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट में गर्दन व निजी अंगों पर चोटों के निशान, कपड़ों पर पुरुष सीमेन के ट्रेस और प्रतिरोध के सबूत मिले. शुरुआत में पटना पुलिस ने इसे संदिग्ध आत्महत्या या स्लीपिंग पिल ओवरडोज बताया. लेकिन परिवार के विरोध और सार्वजनिक आक्रोश के बाद मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया.

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