समस्तीपुर Town

नजर हर खबर पर…

BiharNEWS

जब NDA की झोली में आईं 85 फीसदी सीटें, कांग्रेस साफ राजद की भारी फजीहत; नीतीश क्लिक कर गए

IMG 20250626 WA0160

लालू-राबड़ी युग की समाप्ति के बाद नीतीश कुमार ने 2005 से बिहार की सत्ता संभाली। अपने पांच साल के कार्यों से जनता की उम्मीदों पर खरे उतरे। इसका परिणाम हुआ कि 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को अभूतपूर्व सफलता मिली। एनडीए ने राज्य की 85 फीसदी यानी 243 में से 206 सीटें जीत लीं। जनता ने उसके पक्ष में एक तरफा निर्णय सुना दिया। इसके पहले ऐसी जीत किसी गठबंधन को नहीं मिली।

इस 15वीं विधानसभा में एनडीए की सीटों में पिछली बार की तुलना में भारी वृद्धि हुई। उसे पहले की अपेक्षा 63 सीटें अधिक मिलीं। भाजपा को 36 तो जदयू को 27 सीटों का लाभ हुआ। उधर, राजद और कांग्रेस का सफाया हो गया। राजद की भारी फजीहत हुई और पार्टी केवल 22 सीटों पर सिमट गयी। उसे 32 सीटों का नुकसान हुआ। पिछली बार उसे 54 सीटें मिली थीं। कांग्रेस की स्थिति तो और खराब हो गयी। उसका अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन रहा। उसे केवल चार सीटें मिल पाईं, जबकि पिछली बार उसे 9 सीटें मिली थीं। उसका प्रदर्शन लगातार गिरता रहा और यह क्रम इस चुनाव में भी जारी रहा।

IMG 20250904 WA0013

paid hero ad 20250215 123933 1 scaled

ऐसे इस ऐतिहासिक जीत की सुगंध एनडीए को 2009 के लोकसभा चुनाव के परिणाम से ही लग गयी थी। इसमें जदयू को 20 और भाजपा को 12 सीटें मिलीं। 2004 के लोकसभा चुनाव में जदयू को केवल 6 और भाजपा को 5 सीटें ही मिली थीं। उधर, राजद 22 सीट तो कांग्रेस दो सीटों पर जीती। मगर अगले ही चुनाव में शानदार वापसी करते हुए एनडीए राजद-कांग्रेस से आगे निकल गया और 40 में से 32 सीटें जीत लीं। यहीं से एनडीए ने विधानसभा चुनाव में अपनी जीत का रास्ता बना लिया। मगर विधानसभा चुनाव का परिणाम लोकसभा चुनाव परिणाम से भी बेहतर रहा। लोकसभा चुनाव में उसे 80 फीसदी सीटों पर सफलता मिली थीं। विधानसभा में एनडीए की सफलता लोकसभा से पांच फीसदी अधिक रही।

IMG 20240904 WA0139

एनडीए की जीत में नीतीश कुमार के कार्यों का योगदान

दरअसल, एनडीए की इस शानदार जीत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन और न्याय के साथ विकास की अवधारणा का बड़ा योगदान रहा। आम लोगों ने इसे पसंद किया। इसके अलावा आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण से लोगों का विश्वास बढ़ा। लोग देर रात सड़कों पर परिवार के साथ निकलने लगे। बड़े-बड़े अपराधी पकड़े जाने लगे। ऐसे में बाहर भी राज्य की छवि बदलने लगी।

लड़कियों के लिए साइकिल योजना अघोषित क्रांति

व्यापक पैमाने पर नौकरी देने की प्रक्रिया का प्रारंभ होना और इसके लिए विभिन्न आयोगों की परीक्षाओं को क्रमबद्ध तरीके से आयोजित करने से युवाओं में उम्मीद जगी। बिहार लोक सेवा आयोग और राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाएं नियमित होने लगी थी। इस बीच नीतीश कुमार ने नौवीं की बालिकाओं के लिए साइकिल योजना की शुरुआत की। इसने बिहार में अघोषित क्रांति कर दी। इससे स्कूलों से दूर जा रही लड़कियों में शिक्षा के प्रति जबरदस्त आकर्षण पैदा हुआ। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को इस योजना ने काफी प्रभावित किया। इस योजना से विदेशों में भी बिहार को सराहना मिली। नीतीश कुमार ने बालकों के लिए भी इस योजना को लागू कर दिया। इसी क्रम में बालिका पोशाक योजना भी प्रारंभ की गई। इन सब योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्र में नीतीश कुमार की लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ।

Dr Chandramani Rai 12x18 Sticker scaled

परिसीमन के बाद बिहार विधानसभा का पहला चुनाव

बिहार में लोकसभा एवं विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के बाद पहला विधानसभा चुनाव 2010 में हुआ था। बिहार बंटवारे के बाद पहली बार इस चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए दो सीटें आरक्षित की गई थीं। इस चुनाव में 203 सामान्य सीटें, 38 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें यानी कुल 243 सीटों के लिए मतदान कराया गया। जदयू और भाजपा ने 39.07 प्रतिशत वोट हासिल किए। इसमें जदयू को 22.57 प्रतिशत तो भाजपा को 16.49 प्रतिशत वोट मिले। राजद को 18.84 प्रतिशत पर सिमट गया।

कुल 3523 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, जिनमें 3216 पुरुष उम्मीदवार थे। इनमें 209 जीतने में कामयाब रहे। वहीं 2777 पुरुष उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। इस चुनाव में 307 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरीं । इनमें 34 जीतीं, जबकि 242 की जमानत जब्त हो गई। इस चुनाव में कुल 3019 उम्मीदवार जमानत बचाने में नाकामयाब साबित हुए।

इस चुनाव में जीतने वाले प्रमुख नेता

राजेश सिंह, सतीशचंद्र दूबे, चंद्रमोहन राय, विनय बिहारी, दिलीप वर्मा, प्रमोद कुमार, पवन कुमार जायसवाल, सैफुद्दीन, शाहीद अली खान, विनोद नारायण झा, नीतीश मिश्र, बिजेंद्र प्रसाद यादव, अख्तरुल ईमान, तारकिशोर प्रसाद, नरेंद्र नारायण यादव, अब्दुलबारी सिद्दीकी, जर्नादन सिंह सिग्रीवाल, अश्विनी कुमार चौबे, सदानंद सिंह, नंद किशोर यादव, अरुण कुमार सिन्हा, श्याम रजक, भागीरथी देवी, मनोरमा प्रसाद, रेणू देवी, मीना द्विवेदी, रजिया खातून, रंजू गीता, बीमा भारती, लेशी सिंह, अनु शुक्ला।

IMG 20250204 WA0010

जीविका योजना की शुरुआत

इस बीच बिहार में जीविका की शुरुआत हुई। ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की यह काफी प्रभावी योजना साबित हुई। सांप्रदायिक तनाव को कम करने के लिए 2006 में कब्रिस्तानों की घेराबंदी शुरू की गयी। उनके लिए कई कल्याणकारी योजनाएं भी शुरू की गईं। इससे मुस्लिमों में सुरक्षा का भाव पैदा हुआ। इन सबका असर चुनाव पर साफ नजर आया। हर वर्ग ने नीतीश कुमार के शासन को पसंद करते हुए उन्हें दोबारा सत्ता की बागडोर सौंपी।

IMG 20250821 WA0010

IMG 20250728 WA0000

IMG 20241218 WA0041

IMG 20230818 WA0018 02

20201015 075150