शुक्रवार, अक्टूबर 30, 2026
Latest:

समस्तीपुर Town

नजर हर खबर पर…

SamastipurNEWS

समस्तीपुर में खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच पर कर्मचारियों की कमी का असर; तीन महीने में जांच के लिए भेजे गए 43 नमूने, सिर्फ 4 की रिपोर्ट मिली

paid hero ad 20250215 123933 1 scaled

समस्तीपुर : जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच और मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था कर्मचारियों की कमी के कारण प्रभावित हो रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से पिछले तीन महीने के दौरान जांच के लिए भेजे गए 43 नमूनों में से अब तक सिर्फ चार की ही रिपोर्ट प्राप्त हुई है। वहीं, शेष 39 नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट मिलने में हो रही देरी के कारण खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की समय पर पुष्टि करने और संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने में परेशानी हो रही है।

विभाग के सामने कर्मचारियों की कमी के साथ-साथ सीमित संसाधनों में जिले भर में जांच अभियान चलाने की चुनौती बनी हुई है। नियमानुसार खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच रिपोर्ट 14 दिनों के भीतर मिल जानी चाहिए। हालांकि, कई मामलों में रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं। नमूना संग्रह करने के बाद उसे जांच के लिए पटना स्थित प्रयोगशाला भेजा जाता है। इसके बाद प्रयोगशाला से रिपोर्ट मिलने पर ही संबंधित खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता, निर्धारित मानकों के अनुरूप होने या उसमें मिलावट की स्थिति स्पष्ट हो पाती है। ऐसे में रिपोर्ट आने में देरी होने से विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए इंतजार करना पड़ता है।

file 0000000024b48211aa752e89fc9a15de

अक्टूबर में भेजे गए 23 नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार :

खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए अक्टूबर महीने में भी नमूना संग्रह कर पटना स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। इस महीने कुल 23 नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। इन नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही संबंधित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, पिछले महीनों में भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट लंबित रहने से विभाग के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी भी एक बड़ी चुनौती है। जिला फूड सेफ्टी ऑफिसर रामा स्वामी वेंकेंट रमन शर्मा के पास समस्तीपुर के अलावा दरभंगा और मधुबनी जिले का भी प्रभार है। ऐसे में तीन जिलों की जिम्मेदारी संभालने के बीच खाद्य पदार्थों की जांच, नमूना संग्रह और मिलावट के खिलाफ कार्रवाई जैसी गतिविधियों का संचालन करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

IMG 20240904 WA0139

जिले में दो हजार से अधिक मिठाई दुकानें :

जिले में खाद्य कारोबार का दायरा काफी बड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में करीब दो हजार के करीब छोटी-बड़ी मिठाई की दुकानें हैं। इसके अलावा चार दर्जन से अधिक ऐसी फैक्ट्रियां हैं, जहां कच्चे माल से मिठाइयां तैयार की जाती हैं। इतनी बड़ी संख्या में दुकानों और उत्पादन इकाइयों की निगरानी करना खाद्य सुरक्षा विभाग के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी की जरूरत भी बढ़ जाती है। मिठाई तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले दूध, खोआ, घी, तेल, रंग और अन्य कच्चे माल की गुणवत्ता का खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से विशेष महत्व है। ऐसे में दुकानों और उत्पादन इकाइयों की नियमित जांच तथा संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूनों की समय पर जांच जरूरी है।

FB ADD scaled

Picsart 26 10 29 10 11 10 900
रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी मिलावट की स्थिति :

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में लैब की जांच रिपोर्ट की अहम भूमिका होती है। केवल नमूना लेने से किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट की पुष्टि नहीं होती। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर ही यह निर्धारित किया जाता है कि संबंधित खाद्य पदार्थ निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं। नमूना असुरक्षित पाए जाने की स्थिति में संबंधित कारोबारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, पिछले तीन महीने के दौरान भेजे गए 43 नमूनों में से 39 की रिपोर्ट लंबित है। इन रिपोर्टों के आने के बाद ही संबंधित नमूनों की गुणवत्ता के संबंध में स्थिति स्पष्ट होगी।

IMG 20260516 WA0116

20201015 075150