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एजेंसी और ठेका प्रथा खत्म कर श्रमिकों को स्थायी करे विश्वविद्यालय प्रशासन, भाकपा-माले की दोटूक

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समस्तीपुर : डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में वर्षों से निरंतर कार्यरत सैकड़ों श्रमिकों एवं रात्रि सुरक्षा प्रहरियों के श्रम का लगातार हो रहे शोषण और रोजगार की गहरी असुरक्षा को लेकर भाकपा-माले ने तीखा रुख अपनाया है. भाकपा-माले जिला कमेटी सदस्य रौशन कुमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि परिसर में चल रही एजेंसी, ठेका एवं आउटसोर्सिंग की कुप्रथा को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए और सभी पात्र श्रमिकों को स्थायी किया जाए. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक व प्रशासनिक भवनों, प्रयोगशालाओं, छात्रावासों, डेयरी फार्म, कृषि अनुसंधान प्रक्षेत्र और साफ-सफाई जैसे अहम कार्यों में श्रमिक वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

नेता ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय से अपनी निष्ठापूर्वक सेवाएं देने वाले इन श्रमिकों को न तो स्थायी रोजगार मिल रहा है और न ही पर्याप्त कार्य दिवस सुनिश्चित किए जा रहे हैं. महीने में महज 18 दिन काम देने की व्यवस्था सीधे तौर पर श्रमिकों के साथ अन्याय और उनका आर्थिक शोषण है. इसे तुरंत समाप्त कर कम से कम 26 दिन का काम और सरकार द्वारा निर्धारित पूरी न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की जानी चाहिए. एजेंसियों के माध्यम से काम करने वाले श्रमिकों की मजदूरी में भारी कटौती की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं.

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मजदूरी के भुगतान का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

रौशन कुमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कहा कि प्रशासन यह साफ करे कि विभिन्न एजेंसियों को कुल कितनी राशि का भुगतान किया जाता है और इसके मुकाबले धरातल पर श्रमिकों को वास्तव में कितनी मजदूरी मिलती है. उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा एजेंसियों द्वारा किए जा रहे भुगतानों का पूरा हिसाब सार्वजनिक किए जाने की जोरदार मांग की है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में श्रमिक क्यों शोषण झेलने को विवश हैं.

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मांगें पूरी न होने पर वृहद आंदोलन की चेतावनी

भाकपा-माले नेता ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस गंभीर मामले पर शीघ्र कोई सकारात्मक पहल नहीं की, तो पार्टी श्रमिकों को संगठित कर कुलपति के समक्ष जोरदार प्रदर्शन करेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए अपने आंदोलन को और अधिक तेज करेगी. उन्होंने मांग की है कि नियमित प्रकृति के कार्यों से ठेका प्रथा समाप्त हो और सभी सुरक्षा प्रहरियों व श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का पूरा लाभ मिले.

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