समस्तीपुर जिले के सभी थानों में बनेगा बाल सहायता डेस्क, बच्चों के लिए सहज माहौल तैयार करने के लिए कमरे को बाल अनुकूल और रंगीन बनाया जाएगा

समस्तीपुर : जिले के सभी पुलिस थानों में अब बच्चों के लिए अलग बाल सहायता डेस्क बनाया जाएगा। बाल आरोपी और बाल पीड़ितों को थाने में सुरक्षित, संवेदनशील और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था की जा रही है। महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से जिले के सभी थानों में बाल सहायता डेस्क के काम करने की योजना है। पुलिस मुख्यालय ने जिले के सभी थानों से बाल सहायता डेस्क के गठन से संबंधित अनुपालन रिपोर्ट 5 अक्टूबर तक मांगी है। यह पहल सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निर्देशों के तहत की जा रही है।
पुलिस मुख्यालय के अपराध अनुसंधान विभाग (कमजोर वर्ग) के निर्देश के अनुसार, बिहार पुलिस अधिनियम 2007 की धारा 8 (5) और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत डेस्क की स्थापना की जाएगी। प्रत्येक थाने में इसका संचालन बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में होगा। बाल सहायता डेस्क को थाने के लॉकअप से अलग स्थान पर बनाया जाएगा। बच्चों के लिए सहज माहौल तैयार करने के उद्देश्य से कमरे को बाल अनुकूल और रंगीन बनाया जाएगा। डेस्क पर बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर के साथ जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर भी प्रदर्शित किया जाएगा।


बालिकाओं की शिकायत के लिए महिला पुलिसकर्मी :
बालिकाओं की समस्याओं को सुनने और उनसे संवाद करने के लिए थानों में योग्य महिला पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। इससे बालिकाओं को अपनी शिकायत और समस्याएं सहजता से बताने में मदद मिलेगी। पुलिस मुख्यालय ने डेस्क पर प्रदर्शित सभी मोबाइल नंबरों को हमेशा सक्रिय रखने का निर्देश दिया है। बच्चों या उनके अभिभावकों की ओर से मिलने वाली शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने के साथ उसका उचित रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। बाल सहायता डेस्क पर मिलने वाली शिकायतों और सहायता संबंधी अनुरोधों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाएगा। बच्चों से जुड़े मामलों में उनकी निजता और गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

डीएसपी सिया भारती करेंगी निगरानी :
समस्तीपुर जिले में डीएसपी (विशेष अपराध) सिया भारती सहित अन्य वरीय पुलिस अधिकारी बाल सहायता डेस्क के कामकाज की नियमित निगरानी करेंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशील और प्रभावी पुलिसिंग सुनिश्चित करना है। बच्चों से जुड़े मामलों में उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। साथ ही बाल आरोपियों के साथ भी सामान्य अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। कई बार बच्चे अथवा उनके अभिभावक किसी घटना की शिकायत लेकर थाने पहुंचते हैं। ऐसे मामलों में बच्चों की निजता बनाए रखना जरूरी होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए थानों में अलग बाल सहायता डेस्क की व्यवस्था की जा रही है। इससे बच्चों और उनके अभिभावकों को थाने में शिकायत दर्ज कराने के दौरान अपेक्षाकृत सुरक्षित और सहज वातावरण मिल सकेगा।



