खेत बनी कक्षा, कुलपति बने किसान; केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में धान रोपाई का अनोखा आयोजन

समस्तीपुर/पूसा : डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीएयू), पूसा के प्रायोगिक फार्म में अनोखा नजारा देखने को मिला, जब विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय स्वयं खेत में उतरकर वैज्ञानिकों और छात्रों के साथ धान की रोपनी करते नजर आए। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘धान रोपाई मिलन कार्यक्रम’ का मुख्य उद्देश्य छात्रों को प्रयोगशाला से बाहर निकालकर खेती की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ना था।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के प्रायोगिक फार्म में मंगलवार को अनोखा नजारा देखने को मिला।विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने वैज्ञानिकों और छात्रों के साथ स्वयं खेत में उतरकर धान की रोपनी की। इसका 'धान रोपाई मिलन कार्यक्रम' का उद्देश्य छात्रों… pic.twitter.com/nyQFtlSxha
— Samastipur Town (@samastipurtown) July 11, 2026
इस अवसर पर कुलपति डॉ. पांडेय के साथ स्नातकोत्तर कृषि महाविद्यालय (पीजीसीए) के डीन डॉ. मयंक राय, धान वैज्ञानिकों की टीम और बड़ी संख्या में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं भी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने कहा कि कृषि शिक्षा केवल किताबों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जब तक वैज्ञानिक और छात्र स्वयं खेत में उतरकर खेती की बारीकियों को नहीं समझेंगे, तब तक ‘लैब टू लैंड’ का सपना साकार नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि छात्रों को मिट्टी, पानी और फसल की वास्तविक परिस्थितियों का प्रत्यक्ष अनुभव देने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य है कि यहां होने वाला हर शोध सीधे किसानों के खेत और उनकी आय बढ़ाने से जुड़ा हो। पीजीसीए के डीन डॉ. मयंक राय ने कहा कि कुलपति के निर्देश पर आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों के कौशल विकास के लिए एक बेहतरीन मंच साबित होगा। रोपनी, खेत की तैयारी और पौधों की उचित दूरी जैसी तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव उन्हें भविष्य में बेहतर कृषि वैज्ञानिक और कृषि उद्यमी बनने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय आगे भी ऐसे फील्ड आधारित कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।

कार्यक्रम के दौरान छात्रों को पैडलिंग, ले-आउट डिजाइनिंग तथा वैज्ञानिक तरीके से धान की रोपनी का प्रशिक्षण दिया गया। धान वैज्ञानिक डॉ. नीलांजय ने कहा कि इस तरह के व्यावहारिक प्रदर्शन से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे जलवायु-स्मार्ट खेती की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना करने के लिए तैयार हो सकेंगे। विश्वविद्यालय के इस अभिनव प्रयास को छात्रों और शिक्षकों ने कृषि शिक्षा को व्यवहारिक और किसानोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।



