समस्तीपुर : समस्तीपुर जंक्शन से 14 जून को अपहृत किए गए आठ माह के मासूम को रेल पुलिस ने करीब 11 दिनों की लगातार जांच, तकनीकी अनुसंधान और कई जिलों में छापेमारी के बाद सकुशल बरामद कर लिया। पुलिस ने इस मामले में दो कथित झोला छाप डॉक्टर समेत पांच लोगों को गिरफ्तार करते हुए बच्चे की खरीद-बिक्री करने वाले गिरोह का भी पर्दाफाश किया है। बरामदगी के बाद मासूम को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि मासूम का सौदा 3.80 लाख रुपये में किया गया था। बेटे की चाह में एक महिला ने बच्चे को खरीद लिया था।
गिरफ्तार आरोपितों में बच्चा चुराने वाली मोतिहारी के कजराहन निवासी शांति देवी, उसका साथ देने वाले मोतिहारी जिले के मधुबन थाना क्षेत्र के हरिनारायणपुर मुजाहिदा वार्ड-4 निवासी सन्नी साहनी, राजेपुर थाना क्षेत्र के काशी पकड़ी निवासी कथित झोलाछाप डॉक्टर सुनील कुमार, मेहसी थाना क्षेत्र के फुलकारिया निवासी झोलाछाप डॉक्टर विकास कुमार तथा बच्चा खरीदने वाली सारण जिले के चैनपुर तरैया निवासी सुमन देवी शामिल हैं। पुलिस ने अपहृत बालक को सारण जिले के अमनौर थाना क्षेत्र स्थित बलुआ नारायणपुर गांव में सुमन देवी के घर से सकुशल बरामद किया। इसके बाद बच्चे को उसके माता-पिता के हवाले कर दिया गया।
पुलिस के अनुसार गोविंदपुर खजूरी निवासी रंजीत राय अपनी पत्नी और आठ माह के बेटे के साथ 14 जून की सुबह समस्तीपुर जंक्शन पहुंचे थे। उन्हें हैदराबाद जाने वाली ट्रेन पकड़नी थी। इसी दौरान सन्नी साहनी और शांति देवी ने दंपती से बातचीत शुरू की और धीरे-धीरे उनका विश्वास जीत लिया। दोनों ने खुद को सहयात्री बताकर परिवार से घनिष्ठता बढ़ा ली। दोपहर के समय सन्नी साहनी ने दंपती को यह कहकर भ्रमित किया कि हैदराबाद जाने वाली ट्रेन में अत्यधिक भीड़ है और उसमें चढ़ पाना मुश्किल होगा। इसी बीच बच्चा सो गया। जब पिता किसी काम से स्टेशन परिसर से बाहर गए, तब सन्नी साहनी बच्चे की मां को पति को खोजने के बहाने स्टेशन से दूर ले गया। मौके का फायदा उठाकर शांति देवी प्लेटफॉर्म पर सो रहे बच्चे को गोद में उठाकर परीक्षा स्पेशल ट्रेन से मुजफ्फरपुर के लिए रवाना हो गई।
मुजफ्फरपुर पहुंचने के बाद शांति देवी बस से मेहसी पहुंची। कुछ देर बाद सन्नी साहनी भी वहां पहुंच गया और उसने शांति देवी को 10 हजार रुपये दिए। इसके बाद बच्चा मेहसी के एक झोलाछाप डॉक्टर सुनील कुमार के घर पहुंचाया गया, जहां पूरी रात उसे रखा गया। अगले दिन सुनील कुमार ने बच्चे को विकास कुमार के हवाले कर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि विकास कुमार ने सुनील कुमार को तीन लाख रुपये दिए, जबकि इस पूरे सौदे में सन्नी साहनी को 1.30 लाख रुपये मिले। इसके बाद विकास कुमार ने बच्चे को सारण जिले की सुमन देवी के हवाले कर दिया।
जांच में यह भी सामने आया कि सुमन देवी की पहले से तीन बेटियां हैं। पुत्र की चाह में उसने गिरोह के संपर्क में आकर 3.80 लाख रुपये देकर मासूम को खरीद लिया। पुलिस का कहना है कि इसी लालच ने उसे गंभीर अपराध का हिस्सा बना दिया। इधर 11 दिनों से बेटे की तलाश में भटक रहे माता-पिता को जब पुलिस ने उनके लाल को सकुशल सौंपा तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। परिवार ने पुलिस टीम का आभार जताया। मासूम पूरी तरह सुरक्षित मिला, जिससे पुलिस ने भी राहत की सांस ली।
रेल थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम का गठन किया। स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन ट्रैकिंग और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस लगातार एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंचती रही। समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और सारण सहित कई स्थानों पर लगातार छापेमारी की गई। आखिरकार पुलिस पूरे गिरोह तक पहुंचने में सफल रही और मासूम को सुरक्षित बरामद कर लिया। इस पूरे अभियान का नेतृत्व रेल थाना समस्तीपुर के थानाध्यक्ष बीरबल कुमार ने किया। टीम में सब इंस्पेक्टर नंदिनी कुमारी, एएसआई बाल मुकुंद शर्मा, गौरव कुमार, हरेराम, सीआईबी के दीपक कुमार, पीटीसी के विजय कुमार, रवीश कुमार, शुभम कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
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