समस्तीपुर : जिले के जमुआरी, कमला, नून व वाया नदी अपना अस्तित्व बचाने की अंतिम लड़ाई लड़ रही है। धीरे धीरे नदी नाले में तब्दिल होने के बाद अब खत्म हो चुकी है। जहां पर इसका वजूद कुछ शेष है तो वो वहां अब यह किसी काम की नहीं रह गई है। जिले के पटोरी, मोहिउद्दीननगर एवं विद्यापतिनगर प्रखंडों से गुजरने वाली गंगा की सहायक नदी वाया का पूर्ण वजूद था तब जिले के लगभग 50 किलोमीटर की लंबाई में नदी के दोनों और बसने वाले गांव के किसानों को वर्ष भर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो जाता था परंतु स्थिति ऐसी हो गई कि नदी तट पर बसे होने के बावजूद किसानों को निजी बोरिंग से खेतों का पटवन करना पड़ता है।
बाढ़ के दिनों में तो नदी में पानी नजर आ जाता है परंतु बाद में नदी में पानी नजर नहीं आता है। जल संसाधन विभाग भी इस नदी के समाप्त होते वजूद को बचाने के लिए उचित कदम नहीं उठा रहा है। हसनपुर सूरत के किसान राम करण सिंह, महेश कुमार सिंह, मनोज कुमार झा ने बताया कि पहले वर्ष भर खेतों की सिंचाई के लिए वाया नदी का जल उपलब्ध रहता था परंतु स्थिति अब पूरी तरह बदल चुकी है। जिले के सिघिंया प्रखंड के उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों से होकर बहने वाली कमला नदी में नित्य जमा हो रहे गाद के कारण तल ऊंचा होने से बरसाती नदी में तब्दील होता जा रहा है। जिले में करीब 35 किलोमीटर में फैली इस नदी के लिए जल जीवन हरियाली के तहत जल स्रोतों के संरक्षण सम्बंधित सरकारी योजना भी अब तक बेअसर प्रतीत हो रहा है।
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