समस्तीपुर : मोहनपुर स्थित 132/33 केवी ग्रिड उपकेंद्र में रविवार को 33 केवी मेन बस का विंटर मेंटेनेंस कार्य के कारण बिजली आपूर्ति करीब साढ़े आठ घंटे तक बाधित रही। शीतलहर के बीच साढ़े 8 घंटे बिजली आपूर्ति बंद रहने से खासकर शहरी क्षेत्र के हजारों उपभोक्ताओं को परेशानी हुई। बिजली आपूर्ति नहीं मिलने से जहां ठंड के मौसम में हीटर, गीजर सहित सभी उपकरण बंद रहे। वहीं बिजली चलित सभी तरह के व्यवसाय भी प्रभावित रहे।
हालांकि आपूर्ति बंद रखने की सूचना बिजली कंपनी पहले ही प्रसारित कर चुकी थी। इसके बावजूद कई जगहों से पानी, संचार सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए उपभोक्ता इधर-उधर भटकते दिखे। कई जगहों पर पीने के अलावे सफाई के लिए पानी की किल्लत भी हो गई। इधर, पूरे दिन बिजली आपूर्ति बंद रहने से प्राइवेट सरकारी अस्पतालों व खासकर छोटे क्लीनिकों का संचालन प्रभावित रहा।
जेई ग्रिड अजय कुमार ने बताया कि सर्दियों के मौसम के लिए बिजली ग्रिड शीतकालीन मरम्मत और रखरखाव करना जरूरी है जिससे बिजली की आपूर्ति सुचारू रूप से बनी रहे और सर्दियों में मौसम की मार से उपकरणों की कार्यक्षमता प्रभावित ना हो। 33 केवीए विद्युत संचरण व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत थी, इसको लेकर उपभोक्ताओं को शनिवार को ही पूर्व से सुचित कर दिया गया था।
तापमान गिरने से आपूर्ति में तमाम परेशानी :
जेई ग्रिड अजय कुमार का कहना है कि तापमान गिरने से बिजली के तार सिकुड़ जाते हैं। पुराने और जर्जर तारों पर अचानक दबाव बढ़ने से वे टूटकर गिरने लगते हैं। इससे आपूर्ति बाधित होने के साथ हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। कोहरे और नमी के कारण इंसुलेटर गीले हो जाते हैं। इससे फ्लैशओवर और फ्यूज उड़ने की घटनाएं बढ़ गई हैं। विभाग का कहना है कि ठंड के मौसम को देखते हुए विशेष मेंटेनेंस अभियान चलाया जा रहा है।ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने पर भी काम चल रहा है।
ओवरलोडिंग से ट्रिपिंग की समस्या बढ़ी :
इधर, ठंड बढ़ते ही रूम हीटर, ब्लोअर और गीजर के अधिक उपयोग से बिजली का लोड अचानक बढ़ गया है। कमजोर क्षमता वाले ट्रांसफार्मर इस अतिरिक्त लोड को सहन नहीं कर पा रहे और ओवरलोड के कारण ट्रिप या खराब हो रहे हैं। बिजली विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि कोहरे और ठंड के कारण फॉल्ट की पहचान करने में भी समय लग रहा है, जिससे मरम्मत कार्य में देरी हो रही है।
सर्दी के मौसम से पहले होना चाहिए था मेंटेनेंस :
विद्युत उपभोक्ता अभिषेक कुमार का कहना है कि सर्दी के मौसम से पहले ही फीडरों का मेंटेनेंस होना चाहिए था। पेड़ की डालियों में ओस (पानी) और बिजली के तारों (गर्म/ठंडा फेज) के संपर्क में आने से शार्ट सर्किट बढ़ा है। पानी बिजली का अच्छा संवाहक (कंडक्टर) होता है, जो लीकेज करंट (फाल्ट करंट) को जमीन तक पहुंचाता है और फ्यूज उड़ा देता है या खराबी पैदा करता है, जिससे बिजली की आपूर्ति बाधित होती है। ठिठुरन ठंड का दौर शुरू हो गया है तब विभाग शहर के विभिन्न भागों में पेड़ों की टहनियों को लाइनों से हटा रहा और 11 केवी वायर व जंफर को दुरुस्त कर रहा है। ठंड शुरू होने से पहले ही विभाग को यह कर लेना चाहिए था।
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