Samastipur

समस्तीपुर में मिथिला पेंटिंग से सजे ‘स्वीप’ लोगो का किया गया अनावरण, कुंदन कुमार रॉय ने तैयार किया विशेष लोगो

समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले में मतदाता जागरूकता अभियान को रचनात्मक स्वरूप देते हुए बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम रोशन कुशवाहा ने स्वीप लोगो का अनावरण किया। स्वीप आइकॉन कुंदन कुमार रॉय द्वारा तैयार यह विशेष लोगो पारंपरिक मिथिला पेंटिंग शैली में निर्मित है, जो बिहार की सांस्कृतिक पहचान के साथ मतदाता जागरूकता का सशक्त संदेश देता है।

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कार्यक्रम के दौरान स्वीप नोडल पदाधिकारी सह एनडीसी रजनीश कुमार राय, डीपीओ आईसीडीएस सुनीता कुमारी, और सहायक निदेशक, जिला दिव्यांगजन सोनाली सहित संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे और सभी ने संयुक्त रूप से लोगो का अनावरण किया। जिला निर्वाचन पदाधिकारी रोशन कुशवाहा ने कहा कि यह लोगो मतदाताओं को मतदान के महत्व के प्रति प्रेरित करेगा।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम रोशन कुशवाहा ने कहा कि मतदान देना केवल अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह लोगो जन-जागरूकता सामग्री, प्रचार वाहनों, पोस्टरों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग मतदान के लिए प्रेरित हों। मधुबनी कला के माध्यम से तैयार यह अनूठा लोगो जिले की सृजनात्मक सोच और लोकतंत्र के प्रति गहरी निष्ठा का प्रतीक बन गया है। जिला प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे 6 नवंबर को अवश्य मतदान करें और अपने मत से लोकतंत्र को और सशक्त बनाएं।

वीडियो :

कलर ब्लाइंडनेस के शिकार हैं कुंदन कुमार रॉय :

कुंदन कुमार रॉय कलर ब्लाइंडनेस से पीड़ित है और उनके द्वारा बनाई गई मिथिला पेंटिंग की विदेश में भी मांग रहती है। हाल ही में उन्होंने महापर्व छठ के दौरान सूप पर मिथिला पेंटिंग बनाई थी जिसकी मांग विदेशों में खूब हुई थी। कुंदन सब देख सकते हैं, लेकिन उन्होंने कभी इंद्रधनुष नहीं देखा। न नीला आसमान देखा और न उन्होंने सिंदूरी रंग में डूबी कभी कोई शाम देखी। कुंदन ने दुनिया को सिर्फ दो ही रंगों में देखा है। ब्लैक और वाइट। यानी उनकी दुनिया काले और सफेद रंग की ही है। उन्हें कलर ब्लाइंडनेस है। कुंदन बताते हैं कि ‘कलर ब्लाइंडनेस की समस्या के बारे में उनके मां-पिताजी को बहुत बाद में पता चला। वह लाल, हरा, गुलाबी, भूरा, कत्थई, मरून, नीला आदि रंग को ठीक से नहीं देख पाते। कलर ब्लाइंडनेस जैसी कोई बीमारी भी होती है, यह मेरे मां-पिताजी शुरू में नहीं जानते थे।’ वह रंग का नाम पढ़कर या पूछकर कलाकृति में रंग भरते हैं।

Avinash Roy

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