समस्तीपुर : जिले के विभिन्न थानों में जब्त वाहनों का ढेर अब गंभीर समस्या बनता जा रहा है। वर्षों से हजारों बाइक, ऑटो और चारपहिया वाहन थानों के परिसरों में खड़े-खड़े कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। अनुमान है कि जिलेभर में इनकी संख्या पाँच हजार से अधिक है, जिनमें सबसे ज्यादा करीब 80 प्रतिशत दोपहिया वाहन हैं। थाने के परिसरों में जगह की कमी के कारण कई स्थानों पर गाड़ियों को एक-दूसरे के ऊपर रख दिया गया है। लंबे समय तक बिना रखरखाव के पड़े रहने से इन पर जंग लग गया है और कई वाहन तो कबाड़ के रूप में भी बेचने लायक नहीं बचे हैं।
नतीजा यह है कि जहाँ थानों की साफ-सफाई और जगह की समस्या बढ़ रही है, वहीं सरकार को करोड़ों रुपए के संभावित राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। बता दें कि जिले में 35 थानें है और अकेले नगर व मुफस्सिल थाने में जब्ती वाहनों की संख्या सैकड़ों में है। इसमें छोटे और बड़े दोनों वाहन शामिल है। समय से निलामी नहीं हो पाने के कारण थानों में वाहनों का पहाड़ खड़ा हो गया है। निलामी नहीं होने के कारण सरकार के राजस्व का भी नुकसान हो रहा है वहीं थाने परिसर में साफ-सफाई भी नहीं हो पाती है।
इस कारण थानों में रखे हुए वाहनों के जमीन के नीचे घास-फूस व जंगल उग आए है और जानकारी के अनुसार, ये वाहन सड़क दुर्घटनाओं, अवैध गतिविधियों और लावारिस हालात में जब्त किए गए हैं। इनकी बढ़ती संख्या के कारण थानों में जगह की भारी किल्लत हो गई है। कई थाने तो ऐसे हैं, जिनके पास खुद की पर्याप्त जगह नहीं है, जिससे जब्त वाहनों को रखने की समस्या और गंभीर हो जाती है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई स्थानों पर वाहनों को गड्ढों में एक के ऊपर एक रख दिया गया है। इसके चलते इनके उचित रखरखाव का भी अभाव है।
लंबे समय तक बिना देखरेख के पड़े रहने के कारण इन वाहनों पर जंग लग चुका है, जिससे वे अब कबाड़ के रूप में भी बेचने लायक नहीं बचे हैं। वहीं, कई थानों में अभी तक मालखाना का पूरा प्रभार थानाध्यक्षों को नहीं सौंपा गया है, जिसके कारण जब्त वाहनों की सही संख्या को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस लचर व्यवस्था के कारण न केवल थानों की जगह की समस्या बढ़ रही है, बल्कि कीमती सरकारी संपत्ति भी व्यर्थ हो रही है।
नियमानुसार थानों में जब्त लावारिश या अन्य प्रकार के वाहनों को तबतक नहीं नीलाम नहीं किया जा सकता है, जब तक इसका मामला कोर्ट से जुड़ा हुआ है। क्योंकि, वाहन को जब्त करने के साथ पुलिस इसे रिकॉर्ड में रखती है और कोर्ट को भी जानकारी दी जाती है। ऐसे में कोर्ट में लंबित मामलों से जुड़े वाहनों की नीलामी या वाहन छोड़ने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है। जिसके कारण थानों में पड़े जब्त वाहन कबाड़ बनकर रह गया है। हालांकि शराब मामले में जब्त वाहनों की समय-समय पर नीलामी की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
लेकिन, अन्य मामलों में जब्त हजारों वाहन बेकार जा रहा है। गाड़ियां तो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, खासकर दोपहिया वाहनों की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई है, जिनके इंजन और टायर पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। उल्लेखनीय है कि थानों में वर्षों से जब्त कबाड़ बन चुके वाहनों की अगर ससमय प्रक्रिया अनुसार नीलामी की जाती तो इससे करोड़ों का राजस्व प्राप्त हो जाता। क्योंकि थानों में पड़े-पड़े नए वाहन भी रखे-रखे सड़कर बेकार हो जाता है, जिसे बाद में कबाड़ के भाव में भी नहीं बेचा जा सकता है।
शराब कांड मामलों में जब्त वाहनों को प्रक्रिया के तहत नीलाम किया जाता है। पुराने जब्त वाहनों को भी विभाग के द्वारा तय निर्देशों के अनुसार निष्पादन करने की प्रक्रिया है। वहीं गंभीर कांडों में जब्त वाहनों की निलामी नहीं होती है।
संजय कुमार पाण्डेय, सदर एसडीपीओ-1 सह एएसपी, समस्तीपुर
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